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Friday, October 16, 2026

पराली जलाने से नष्ट होते हैं मित्र जीवाणु, खेत में ही करें प्रबंधन


वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता

संतकबीरनगर। सेवा संकल्प अभियान के 15वें वर्ष के अवसर पर कृषि विभाग की ओर से जिला पंचायत रिसोर्स सेंटर में पराली प्रबंधन कृषक जागरूकता कार्यक्रम एवं त्वरित मक्का विकास योजना के तहत कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि परियोजना निदेशक रहे। इस दौरान संविधान परिषद के जिला प्रतिनिधि अमरेंद्र राय भी मौजूद रहे।

भूमि संरक्षण अधिकारी दीपचंद चौरसिया ने उन्नतशील मक्का खेती और पराली प्रबंधन की जानकारी देते हुए किसानों से फसल अवशेष नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने बताया कि मक्का की खेती तीनों मौसम में की जा सकती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलने से किसानों को लाभ होता है। खेत में पराली का उचित प्रबंधन करने से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।

कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वैज्ञानिक डॉ. देवेश ने इन-सीटू और एक्स-सीटू पद्धतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन-सीटू पद्धति में फसल अवशेषों को खेत में ही छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिलाया जाता है, जबकि एक्स-सीटू में अवशेषों को खेत से बाहर ले जाकर उनका प्रबंधन किया जाता है। उन्होंने डी-कंपोजर और बायोचार बनाने की जानकारी भी दी।

प्रगतिशील किसान हरकेश चौधरी ने पराली प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और धान के निर्यात पर विचार साझा किए। वैज्ञानिक डॉ. तरुण ने मक्का की उपयोगिता बताते हुए रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर दिया।

जिला कृषि अधिकारी ने उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, फसल बीमा और फार्मर रजिस्ट्री की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किराये पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए भी फार्मर रजिस्ट्री की व्यवस्था है, जिसमें भू-स्वामी का अनुमोदन आवश्यक है।

मुख्य अतिथि ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं। अंत में उप कृषि निदेशक ने किसानों को पराली नहीं जलाने और खेत में ही उसका उचित प्रबंधन करने की शपथ दिलाई।


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