गोरखपुर। आशा और संगिनी कार्यकर्ताओं की लंबित मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। यूनियन ने आगामी 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में महापड़ाव आयोजित करने का ऐलान किया है। इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को मांगपत्र भेजकर मांगों का शीघ्र निस्तारण किए जाने की अपील की गई है।
यूनियन की ओर से दिए गए मांगपत्र में कहा गया है कि 15 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक चले आंदोलन के बाद 7 फरवरी को स्वास्थ्य मंत्री और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच समझौता वार्ता हुई थी। वार्ता में 13 सूत्रीय मांगपत्र पर सहमति बनने का उल्लेख करते हुए यूनियन ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद मांगों को लागू करने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
यूनियन ने आशा और संगिनी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि, प्रोत्साहन राशि के नियमित भुगतान तथा विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में किए गए कार्यों का बकाया भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। मांगपत्र में कहा गया है कि आयुष्मान कार्ड, टीकाकरण, पल्स पोलियो, फाइलेरिया, दस्तक और संचारी रोग नियंत्रण जैसे अभियानों में कार्य करने के बावजूद भुगतान संबंधी समस्याएं बनी हुई हैं।
- मानदेय और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
यूनियन की प्रमुख मांगों में आशा कार्यकर्ताओं को 10 हजार रुपये मासिक भुगतान, राज्य मद से मिलने वाली 1500 रुपये की राशि में वृद्धि कर 7500 रुपये करने तथा विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान शामिल है। इसके अलावा अभियानों में कार्य के लिए प्रतिदिन 500 रुपये प्रोत्साहन राशि निर्धारित करने की मांग की गई है।
मांगपत्र में ईएसआई और पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने, पांच लाख रुपये का चिकित्सा बीमा और दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा देने, चार माह का मातृत्व अवकाश सुनिश्चित करने तथा आशा संगिनियों का मानदेय बढ़ाने की मांग भी शामिल है।
- लंबित भुगतान और मुकदमे वापस लेने की मांग
यूनियन ने स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अभियानों में किए गए कार्यों का बकाया भुगतान करने, आवश्यक मोबाइल और डेटा उपलब्ध कराने तथा आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। साथ ही संबंधित कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान करने पर भी जोर दिया गया है।
यूनियन ने शासन से समझौते में शामिल मांगों को लागू करने और कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण करने की अपील की है। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने के विरोध में 23 अक्टूबर को लखनऊ में महापड़ाव आयोजित कर आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

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