वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
28 अक्टूबर को आचार्य गिरिश नाथ झा देंगे विशिष्ट व्याख्यान, विकसित भारत में भारतीय भाषाओं की भूमिका पर होगी चर्चा
पांडिचेरी। पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से भाषा प्रौद्योगिकी कार्यशाला श्रृंखला की 100वीं कार्यशाला बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को शाम छह बजे ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। ‘विकसित भारत की हिंदी और एआई’ विषय पर आयोजित इस विशेष व्याख्यान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली के संस्कृत एवं प्राच्यविद्या अध्ययन संस्थान के आचार्य गिरिश नाथ झा मुख्य वक्ता होंगे।
आचार्य झा कंप्यूटरीय भाषाविज्ञान और भाषा प्रौद्योगिकी के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हैं। वह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग (सीएसटीटी) के अध्यक्ष रह चुके हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने आयोग की खोज-सुविधायुक्त शब्दावली के विकास में योगदान दिया। वह जेएनयू में संस्कृत एवं प्राच्यविद्या अध्ययन संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे हैं और विश्वविद्यालय में कई शैक्षणिक एवं प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं।
उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में भारतीय भाषाएं, भाषायी कॉर्पस एवं मानक, संस्कृत और हिंदी भाषाविज्ञान, कोशविज्ञान, भारतीय ज्ञान परंपराएं, यंत्रानुवाद, ई-लर्निंग, वेब एवं डेटाबेस प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर अभिकल्पना और स्थानीयकरण शामिल हैं। उन्होंने अनेक पुस्तकें एवं शोध आलेख लिखे हैं तथा 466 से अधिक आमंत्रित व्याख्यान दिए हैं। वह 52 पीएचडी और 46 एमफिल शोधार्थियों का मार्गदर्शन भी कर चुके हैं।
व्याख्यान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बदलते परिदृश्य में हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं की भूमिका पर चर्चा होगी। भाषा प्रौद्योगिकी, डिजिटल भाषायी संसाधनों, यंत्रानुवाद और पारिभाषिक शब्दावली के विकास के माध्यम से शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान तक समावेशी पहुंच बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही, विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भारतीय भाषाओं और तकनीक की संभावनाओं पर प्रकाश डाला जाएगा।
कार्यशाला श्रृंखला की 100वीं कड़ी को भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इसका उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और भाषा-तकनीक में रुचि रखने वाले लोगों को नए शोध एवं विकास से जोड़ना है।
यह कार्यक्रम पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा समन्वित ‘भाषा प्रौद्योगिकी का परिचय’ विषयक स्वयं (SWAYAM) ऑनलाइन पाठ्यक्रम और ई-शिक्षा पहल से भी जुड़ा है। पाठ्यक्रम के समन्वयक एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. सी. जय शंकर बाबू कार्यशाला की अध्यक्षता करेंगे।
जनवरी 2027 सत्र के लिए इस पाठ्यक्रम का पंजीकरण अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। हिंदी, भारतीय भाषाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषा प्रौद्योगिकी में रुचि रखने वाले शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी एवं अन्य इच्छुक प्रतिभागी गूगल मीट के माध्यम से कार्यशाला में शामिल हो सकते हैं।
ऑनलाइन जुड़ने का लिंक: https://meet.google.com/art-tauu-pmo

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