महादेवा, बस्ती। राम मड़ैया में आयोजित रामनाम संकीर्तन कथा के पांचवें दिन भक्ति और आध्यात्मिक प्रसंगों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा व्यास पंडित कृष्ण कुमार शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण, सत्यभामा और पारिजात वृक्ष की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को प्रेम, समर्पण और विनम्रता का संदेश दिया।
कथा का वर्णन करते हुए पंडित कृष्ण कुमार शुक्ल ने बताया कि एक बार देवर्षि नारद स्वर्गलोक से द्वारिका पहुंचे। उनके पास स्वर्ग के पारिजात वृक्ष का एक दिव्य पुष्प था। नारद जी ने वह पुष्प भगवान श्रीकृष्ण को भेंट किया। भगवान ने उसे रुक्मणी जी को दे दिया। यह देखकर सत्यभामा जी नाराज हो गईं और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से अपनी नाराजगी जाहिर की।
भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा को मनाते हुए स्वर्ग से पारिजात वृक्ष ही लाकर उनके आंगन में लगाने का वचन दिया। इसके बाद भगवान गरुड़ पर सवार होकर स्वर्ग पहुंचे। वहां पारिजात वृक्ष को द्वारिका लाने के दौरान देवराज इंद्र ने विरोध किया, लेकिन अंततः भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप को पहचानकर उन्होंने क्षमा मांगी। भगवान पारिजात वृक्ष को द्वारिका ले आए और सत्यभामा के आंगन में स्थापित कर दिया।
पंडित शुक्ल ने बताया कि पारिजात वृक्ष की विशेषता थी कि वह पूरे वर्ष फूलों से लदा रहता था और उसकी सुगंध से द्वारिका महकती थी, लेकिन उसके पुष्प रुक्मणी जी के आंगन में ही गिरते थे।
कथा के आध्यात्मिक संदेश पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य चाहे कितना भी धन, वैभव और ऐश्वर्य प्राप्त कर ले, लेकिन मन में ईर्ष्या और अहंकार रहने पर उसे वास्तविक सुख नहीं मिल सकता। सच्चा सुख प्रेम, त्याग, समर्पण और निष्कपट भक्ति में निहित है। भगवान को भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि भक्त का निर्मल हृदय और सच्चा प्रेम प्रिय है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में आपसी प्रेम, सद्भाव और विनम्रता अपनाने तथा ईर्ष्या और अहंकार से दूर रहने का आह्वान किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव से भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का श्रवण करते रहे।

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