<!--Can't find substitution for tag [blog.voiceofbasti.page]--> - Voice of basti

Voice of basti

सच्ची और अच्छी खबरें

Breaking

वॉयस ऑफ बस्ती में आपका स्वागत है विज्ञापन देने के लिए सम्पर्क करें 9598462331

Monday, September 7, 2026

डिजिटल मीडिया जीवन का विकल्प नहीं, उपयोगी साधन बने : प्रो. संजय द्विवेदी


नई दिल्ली।
भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि डिजिटल मीडिया मनुष्य के लिए उपयोगी साधन है, लेकिन इसे जीवन का विकल्प नहीं बनने देना चाहिए। युवाओं को तकनीक का उपयोग ज्ञान-सृजन, शिक्षा, संवाद, रोजगार और अवसरों के विस्तार के लिए करना चाहिए। डिजिटल माध्यमों पर बढ़ती निर्भरता के बीच मौलिक चिंतन, मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी को बनाए रखना जरूरी है।

वे साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन के लिए गठित संस्था ‘साहित्यायन’ की प्रथम व्याख्यानमाला को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। ‘डिजिटल मीडिया और युवा जीवन-दृष्टि’ विषय पर उन्होंने कहा कि वर्तमान समय वर्नाकुलर, वॉइस और वीडियो का है। डिजिटल क्रांति ने भारतीय भाषाओं के सामने नई संभावनाएं खोली हैं। साहित्य, सिनेमा, रंगमंच और सांस्कृतिक ज्ञान अब वैश्विक मंच तक पहुंच रहा है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हर वायरल सूचना सत्य नहीं होती। किसी संदेश, समाचार या वीडियो को साझा करने से पहले उसके स्रोत और सत्यता की जांच आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने का आह्वान करते हुए कहा, “बुरा मत टाइप करो, बुरा मत लाइक करो और बुरा मत शेयर करो।” सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है।

मीडिया साक्षरता जरूरी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि AI ने शिक्षा, अनुवाद और कंटेंट निर्माण सहित कई क्षेत्रों में अवसर बढ़ाए हैं, लेकिन अत्यधिक निर्भरता मौलिक चिंतन और रचनात्मकता को कमजोर कर सकती है। डीपफेक के दौर में मीडिया एवं सूचना साक्षरता को शिक्षा का हिस्सा बनाना जरूरी है।

उन्होंने अकबर इलाहाबादी के शेर “दर्द को दिल में जगह दो अकबर, इल्म से शायरी नहीं होती” के माध्यम से मानवीय संवेदना को रचनात्मकता का आधार बताया। कार्यक्रम में प्रो. हरीश अरोड़ा ने ‘साहित्यायन’ के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। संचालन शोधार्थी अविरल अभिलाष मिश्र ने किया।

No comments:

Post a Comment

Pages