गोरखपुर। आरक्षण सुधार सत्याग्रह भारत के तत्वावधान में मंगलवार को टाउन हॉल स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय शांतिपूर्ण सत्याग्रह आयोजित किया गया। सत्याग्रह के उपरांत संगठन की ओर से राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भारत सरकार को प्रेषित करने के लिए सौंपा गया।
सत्याग्रह में आरक्षण के स्थान पर संरक्षण आधारित व्यवस्था, सरकारी नौकरियों में योग्यता एवं क्षमता को प्राथमिकता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वन-टाइम अथवा चक्रीय आरक्षण की व्यवस्था, राष्ट्रीय मानव विकास सूचकांक आयोग के गठन, उच्च शिक्षा की शिकायत प्रणाली एवं यूजीसी संबंधी प्रस्तावित प्रावधानों की समीक्षा तथा एससी/एसटी अधिनियम के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
संगठन के संरक्षक श्री राम मूरत उपाध्याय एडवोकेट ने कहा कि आंदोलन किसी जाति, वर्ग या समुदाय के विरुद्ध नहीं है, बल्कि समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी व्यवस्था, योग्यता के उचित सम्मान और वास्तविक सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक सुधारों की मांग को लेकर है। उन्होंने कहा कि वास्तविक पीड़ितों को कानून का प्रभावी संरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन निर्दोष नागरिकों के अधिकारों तथा प्राकृतिक न्याय की रक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
प्रभात धर दुबे ने कहा कि शिक्षा और रोजगार किसी भी युवा के भविष्य की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से वंचित प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के प्रभावी अवसर मिलें और योग्य युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप अवसर प्राप्त हों।
आचार्य चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी (फरसा बाबा) ने कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विकास की नीतियों की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। विकास का आधार केवल आर्थिक आंकड़े नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आय और जीवन-स्तर जैसे वास्तविक मानव विकास के मानक होने चाहिए।
सत्याग्रह संयोजक राम मूरत उपाध्याय एडवोकेट ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार और न्यायपूर्ण अवसर सुनिश्चित करना है। उन्होंने राष्ट्रपति से छह सूत्रीय मांगों पर विशेषज्ञों, विधिवेत्ताओं, शिक्षाविदों एवं संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श कर आवश्यक सुधार की प्रक्रिया शुरू कराने का अनुरोध किया।
कार्यक्रम में देव नाथ उपाध्याय, मनीष सिंह, शुभ यादव, दिवाकर कुमार ओझा, शशांक ओझा, अर्जुन, धीरज, श्रेय राजभर, प्रतिमा सिंह, सीमा ओझा सहित बड़ी संख्या में सत्याग्रही मौजूद रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से संपन्न हुआ।

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