बस्ती। कबीर साहित्य एवं सेवा संस्थान के अध्यक्ष मो. सामईन फारूकी के संयोजन में गुरुवार को प्रेस क्लब सभागार में कार्यक्रम आयोजित कर 1965 के भारत-पाक युद्ध के वीर नायक एवं परमवीर चक्र विजेता कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस दौरान कवियों और शायरों ने काव्य पाठ के माध्यम से अमर बलिदानी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि 10 सितंबर 1965 को वीर अब्दुल हमीद ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके अद्वितीय शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद ने अपनी गन माउंटेड जीप से पाकिस्तानी पैटन टैंकों को निशाना बनाकर भारतीय सैन्य इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। उनका बलिदान देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय, देवेन्द्रनाथ श्रीवास्तव, त्रिभुवन प्रसाद मिश्र और श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद ने अपने अदम्य साहस से साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने बड़ी से बड़ी चुनौती भी छोटी पड़ जाती है। गाजीपुर जिले के धामूपुर गांव में जन्मे वीर अब्दुल हमीद का शौर्य और बलिदान देश हमेशा याद रखेगा। भारतीय सैनिकों के पास सीमित संसाधन होने के बावजूद मातृभूमि की रक्षा का जज्बा और हौसला था।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए मो. सामईन फारूकी ने कहा कि जब-जब वीरता और देशभक्ति की चर्चा होगी, वीर अब्दुल हमीद का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा। अध्यक्षता कर रहे बी.एन. शुक्ल ने कहा कि विषम परिस्थितियों में भी वीर अब्दुल हमीद ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त किया। राष्ट्र उनके शौर्य और बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।
इस अवसर पर दीपक सिंह प्रेमी, डा. वाहिद अली सिद्दीकी, कलीम फारूकी, अनिल श्रीवास्तव, महेश तिवारी, इन्दुभूषण, महेन्द्र तिवारी, आकाश शुक्ल, सलीम वस्तवी, अनवर पारसा, सागर गोरखपुर, लवकुश गुप्ता, जमील अहमद, ओम प्रकाश पाण्डेय, तौव्वाब अली, ओम प्रकाश गौतम, अर्चना श्रीवास्तव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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