गोरखपुर। पूर्व सांसदों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को मिल रही पेंशन और सुविधाओं को लेकर प्रकाशित खबर के बाद पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, गोरखपुर की आवश्यक बैठक सोमवार को परिषद कार्यालय तुर्कमानपुर में हुई। बैठक की अध्यक्षता परिषद अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने की, जबकि संचालन महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने किया।
बैठक में पेंशन व्यवस्था में कथित असमानता को लेकर कर्मचारियों ने चिंता जताई। परिषद अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सम्मानजनक पेंशन और सुविधाएं मिलना गलत नहीं है, लेकिन 30 से 35 वर्षों तक सरकारी सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन से वंचित रखना गंभीर सवाल है।
उन्होंने कहा कि सामने आई खबर में कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों को एक से अधिक पेंशन मिलने का उल्लेख है। दूसरी ओर कर्मचारी अपनी पूरी नौकरी सरकार और जनता की सेवा में लगाने के बाद भी सेवानिवृत्ति के पश्चात निश्चित आय की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेंशन कर्मचारी के वर्षों के सेवाकाल के बदले मिलने वाला सामाजिक सुरक्षा अधिकार है, इसे किसी प्रकार की खैरात नहीं माना जाना चाहिए।
रूपेश श्रीवास्तव ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी के सामने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ स्वास्थ्य, दवा और रोजमर्रा के खर्च की चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में अनिश्चित एवं बाजार आधारित पेंशन व्यवस्था के भरोसे उनका भविष्य छोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की भावनाओं और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने कहा कि पेंशन व्यवस्था में आर्थिक क्षमता और आवश्यकता के आधार पर भी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अरबपति सांसद-विधायक तथा आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को मिलने वाली पेंशन व्यवस्था पर भी सरकार को विचार करना चाहिए, ताकि सार्वजनिक धन का उपयोग सामाजिक न्याय और जरूरतमंदों की सुरक्षा के लिए अधिक प्रभावी ढंग से हो सके।
परिषद नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से NPS समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) तत्काल बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली सिर्फ कर्मचारियों की मांग नहीं, बल्कि उनके सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा है।
रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा, "जब देश अपने जनप्रतिनिधियों को जीवनभर सामाजिक सुरक्षा दे सकता है तो देश की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले कर्मचारियों को बुढ़ापे की निश्चित सुरक्षा देने में सरकार को संकोच क्यों होना चाहिए?" उन्होंने कहा कि कर्मचारी और जनप्रतिनिधि लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अंग हैं, इसलिए पेंशन व्यवस्था में भेदभाव के बजाय न्याय और समानता का भाव होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन की बहाली के लिए चल रहे लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक आंदोलनों को परिषद का समर्थन जारी रहेगा। कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए परिषद हर स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
बैठक में अशोक पांडेय, पंडित श्याम नारायण शुक्ल, अनिल द्विवेदी, राजेश मिश्रा, अनूप कुमार, सौरभ श्रीवास्तव, नरेंद्र धर द्विवेदी, राहुल श्रीवास्तव, इजहार अली, रामधनी पासवान सहित अन्य कर्मचारी नेता मौजूद रहे।

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