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Tuesday, September 15, 2026

प्रसाद योजना से तीर्थ स्थलों का विकास, धार्मिक पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा


वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता

गुवाहाटी/लखनऊ। ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने और देश की समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से मीडिया प्रतिनिधियों को परिचित कराने के उद्देश्य से पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), लखनऊ के नेतृत्व में असम दौरे पर आए उत्तर प्रदेश के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने गुवाहाटी स्थित नीलाचल पहाड़ी पर प्रसिद्ध मां कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन-पूजन किया।

मंदिर के पुजारी प्रांजीत शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को मां कामाख्या मंदिर के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मां कामाख्या देवी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और शक्ति उपासना की महत्वपूर्ण परंपरा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं तथा यहां आयोजित होने वाले प्रमुख अनुष्ठानों के बारे में भी जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि मां कामाख्या देवी मंदिर केवल असम ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसे मीडिया दौरे देश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को भारत की विविध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल को पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014-15 में शुरू की गई तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्धन अभियान (प्रसाद) योजना की भी जानकारी दी गई। अक्टूबर 2017 में इस योजना का नाम बदलकर राष्ट्रीय तीर्थयात्रा कायाकल्प, आध्यात्मिक एवं विरासत संवर्धन अभियान (प्रशाद) किया गया।

प्रसाद योजना के माध्यम से प्रमुख तीर्थ एवं आध्यात्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विकास, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य तीर्थ स्थलों का योजनाबद्ध विकास कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है।

मंदिर के पुजारी प्रांजीत शर्मा ने बताया कि मां कामाख्या मंदिर की धार्मिक परंपराओं और असम की संस्कृति को जानने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों में लगातार रुचि बनी हुई है। धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ते हैं।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर परिसर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर इसकी धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक महत्व और क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधिमंडल ने असम की आध्यात्मिक विरासत को करीब से जानने के इस अनुभव को महत्वपूर्ण बताया।

प्रसाद योजना के तहत तीर्थ स्थलों के विकास से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, आजीविका और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इससे देश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन विकास को भी गति मिल रही है।


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