<!--Can't find substitution for tag [blog.voiceofbasti.page]--> - Voice of basti

Voice of basti

सच्ची और अच्छी खबरें

Breaking

वॉयस ऑफ बस्ती में आपका स्वागत है विज्ञापन देने के लिए सम्पर्क करें 9598462331

Wednesday, September 16, 2026

मानस में घासभूमि संरक्षण पर जोर, हर साल घट रहा 6.5 वर्ग किमी क्षेत्र


वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता

असम। भारत-भूटान सीमा पर स्थित मानस क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के साथ घासभूमि के पुनरुद्धार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मानस का कोर क्षेत्र करीब 850 वर्ग किलोमीटर में फैला है। जैव विविधता से समृद्ध इस क्षेत्र में हाथी, गैंडा और बाघ सहित अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मानस में करीब 2,000 हाथी, 40 से 50 गैंडे और 63 बाघ हैं।

मानस के वन क्षेत्र में घासभूमि वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है। हालांकि यहां हर साल लगभग 6.5 वर्ग किलोमीटर घासभूमि कम हो रही है। इसके पीछे घासभूमि में होने वाले बदलाव और आक्रामक प्रजातियों का फैलाव प्रमुख चुनौती के रूप में सामने आया है। इसे देखते हुए घासभूमि के पुनरुद्धार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

घासभूमि को पुनर्जीवित करने के लिए कैंपा योजनाओं के माध्यम से विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा आक्रामक प्रजातियों को हटाने के लिए यांत्रिक तरीके अपनाए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय घास और वनस्पतियों को दोबारा विकसित होने का अवसर मिल सके।

मानस में उत्तर-पूर्व भारत की पहली घास नर्सरी भी स्थापित की गई है। इसमें करीब 16 प्रजाति की घास की नर्सरी है। इसका उद्देश्य स्थानीय घास प्रजातियों के संरक्षण और घासभूमि के पुनरुद्धार में सहयोग करना है। घासभूमि के संरक्षण से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत करने और मानस की जैव विविधता को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

No comments:

Post a Comment

Pages