गोरखपुर। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति बहुजन समाज अभिव्यक्ति का संयुक्त मोर्चा की ओर से दलित समाज की समस्याओं को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, विधि एवं न्याय मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को 20 सूत्रीय ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन, दलितों पर अत्याचार रोकने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई।
मोर्चा ने ज्ञापन में सरकारी विभागों में आरक्षित पदों पर भर्ती सुनिश्चित करने, निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने और अनुसूचित जाति के विकास के लिए आबादी के अनुपात में बजट आवंटित करने की मांग उठाई। संगठन ने आरोप लगाया कि आरक्षण व्यवस्था का अपेक्षित लाभ दलित समाज को नहीं मिल पा रहा है।
ज्ञापन में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी, दलितों के साथ मारपीट, महिलाओं एवं बच्चियों के उत्पीड़न तथा भूमि पर कब्जे की घटनाओं पर चिंता जताई गई। संगठन ने ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की।
इसके अलावा दलित छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने, छात्रावासों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, भूमिहीन दलितों को भूमि आवंटित करने तथा निम्न आय वर्गीय परिवारों को स्वरोजगार के लिए पांच लाख रुपये तक का ऋण चार प्रतिशत ब्याज दर पर देने की मांग की गई।
मोर्चा ने नगर निगम एवं निकायों में कार्यरत संविदा सफाई कर्मचारियों को न्यूनतम 30 हजार रुपये वेतन, सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति में योग्य दलित उम्मीदवारों को अवसर देने और न्यायालयों में दलित समाज का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं की सुरक्षा तथा उनके अपमान और क्षति की घटनाओं पर कार्रवाई की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
ज्ञापन पर महासचिव/संयोजक रामचंद्र प्रसाद त्यागी, उपाध्यक्ष के.के. भारती एवं अध्यक्ष/मुख्य संयोजक हरि शरण गौतम सहित अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।

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