सीता देवी पत्नी रामरूप ने अधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 24 जुलाई 2026 को गांव में दो पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। उनका 17 वर्षीय पुत्र शिवा उस समय स्कूल से लौट रहा था। आरोप है कि घायल युवती की बहन को एंबुलेंस और 1076 हेल्पलाइन पर सूचना देने के लिए उसने अपना मोबाइल फोन दिया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की जानकारी में की गई इस मदद के बावजूद थाना कप्तानगंज पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।
सीता देवी ने मामले के विवेचक एसआई रवींद्र चंद्र यादव पर फोन के माध्यम से बेटे को फर्जी मामले में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि घटना के वास्तविक तथ्यों के साथ ही 1076 और एंबुलेंस पर की गई कॉल के रिकॉर्ड की भी जांच नहीं की जा रही है।
शिकायतकर्ता ने विवेचक को हटाकर किसी वरिष्ठ एवं स्वतंत्र अधिकारी से जांच कराने, घटना के समय मौके पर मौजूद डायल-112 पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज कराने और 1076 व एंबुलेंस कॉल रिकॉर्ड की डिजिटल जांच कराने की मांग की है। साथ ही बेटे के नाबालिग होने के कारण किशोर न्याय कानून के तहत उसके हितों का ध्यान रखने की अपील की है। सीता देवी ने कहा कि निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी और उनके बेटे का भविष्य प्रभावित होने से बच सकेगा।

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