गोरखपुर। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर गुरुवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचकर्म सभागार में ‘खेलो इंडिया संवाद—खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। माय भारत युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर के युवाओं, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों से संवाद किया। गोरखपुर में कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों छात्र-छात्राओं और युवाओं ने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान मुख्य अतिथि रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति भूपेश गोयल, माय भारत केंद्र गोरखपुर की जिला युवा अधिकारी सीमा पाण्डेय, राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी एवं कोच, राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक तथा विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
- खेल सिर्फ पदक नहीं, व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को खेलों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल सिर्फ पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, आत्मविश्वास और फिटनेस विकसित करने का प्रभावी जरिया हैं। उन्होंने युवाओं से खेल को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया और कहा कि मजबूत खेल संस्कृति विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
गांव और छोटे शहरों में छिपी प्रतिभाओं को तलाशने पर जोर
प्रधानमंत्री ने भारत के 2036 ओलंपिक लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए गांवों और छोटे शहरों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में प्रतिभाओं की तलाश कर उन्हें उनकी क्षमता के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को उन खेलों में भी अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी, जिनमें अभी देश की मौजूदगी सीमित है। सर्फिंग, स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, वॉटर स्पोर्ट्स और विंटर स्पोर्ट्स जैसे खेलों में युवाओं के लिए नए अवसरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने उन्हें नए क्षेत्रों में आगे आने के लिए प्रेरित किया।
- खेल मैदान सिखाता है जीत के साथ हार से सीखना
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल का मैदान युवाओं को केवल जीतना ही नहीं सिखाता, बल्कि हार से सीखकर दोबारा प्रयास करने का जज्बा भी पैदा करता है। खेलों से निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व, टीम भावना और आत्मविश्वास मजबूत होता है। उन्होंने युवाओं से मोबाइल और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के बजाय खेल मैदानों और स्पोर्ट्स सेंटर से जुड़ने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री का संबोधन शुरू होते ही पंचकर्म सभागार में मौजूद युवाओं में उत्साह दिखाई दिया। छात्र-छात्राओं और स्वयंसेवकों ने प्रधानमंत्री की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और खेलों को युवा विकास तथा राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की आवश्यकता पर चर्चा की।
- खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय स्तर पर युवाओं, खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों के बीच संवाद भी हुआ। खेल, फिटनेस, युवा नेतृत्व और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विचार साझा किए गए। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने युवाओं को खेल क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों तथा नियमित अभ्यास के महत्व की जानकारी दी।
जिला युवा अधिकारी सीमा पाण्डेय ने कहा कि ‘खेलो इंडिया संवाद’ युवाओं को खेलों के साथ अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ने वाला प्रभावी मंच है। प्रधानमंत्री का संदेश युवाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे सही दिशा में विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने की है।
- राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों की रही सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम में माय भारत से जुड़े राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। सचिन गौरी वर्मा, अंकेश गौड़, पल्लवी जायसवाल, अनुराग मिश्रा सहित अनेक स्वयंसेवक मौजूद रहे। विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं, युवा प्रतिनिधियों, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को खास बनाया।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित यह संवाद गोरखपुर के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री का संदेश सीधे सुनने का अवसर बना। कार्यक्रम ने युवाओं के बीच यह संदेश भी मजबूत किया कि खेल पदक तक सीमित नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, अनुशासन, व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला हैं।

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