संसद में नेता नहीं कुर्सी के व्यापारी हैं।
पक्ष हो या विपक्ष सबकी यही यारी है।
सिलेक्टेड इशू पर इन सबकी तैयारी है।
देश नहीं अगली चुनाव की जो पारी है।।
वे जानते जब लोग साथसाथ खड़े होंगे ।
तरह- तरह उनसे सवाल जब पूछेंगे ।
हर गली में एक दीवार खड़ी करते हैं।
दिल में बीज एक शक का बो देते हैं ।।
जाति दलित अगड़ी पिछड़ी का नाम ले ।
धर्म मजहब संख्या भागीदारी अंजाम ले।
भाषा या बोली उत्तर दक्षिण का नाम ले ।
दरार बनाकर एक रिश्ते का नाम ले ।।
हर पहचान को हथियार बना देते हैं।
हर इंसान को वे शैतान बना देते हैं।
ऊंचा पद लेकर शोषित बने रहते हैं ।
अचूक कमाई कर दलित बने रहते हैं।।
स्कूलों से ज्यादा कोरे नारों की चिंता है। अस्पतालों से ज्यादा सभाओं की चिंता है।
रोजगार से ज्यादा राजनीति की चिंता है।
काम से ज्यादा ‘मनकी बात’ की चिंता है।।
एक एक कर वे अपना ईमान बेचते हैं ।
सुधार के नाम पर संस्था को बेचते हैं ।
लोगों के विश्वास औ भरोसे को बेचते हैं।
देश का पूरा का पूरा भविष्य बेच देते हैं ।।
त्रासदी नहीं ऐसा नेता पैदा हो जाता है।
उसकी लड़ाई को अपना समझ लेता है।
मीडिया अखबार की सुर्खी बन जाता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है।।
सीमा बॉर्डर पर खड़ा सैनिक नहीं पूछता।
साथी जवान किस जाति से वहां आता ।
किस धर्म और भाषा को वह अपनाता ।
उसकी हर सांस में भारत का नाम आता।।
जबाव ना सुन केवल सवाल पूछते हैं ।
भीड़ को भड़काकर नारे लगवाते हैं ।
देश के टुकड़े तोड़ने की बातें करते हैं ।
सामने वाले को बेवकूफ ही समझते हैं।।
साजिशन दुश्मन सीमा को घेर लेता है।
छिप छिपकर आतंकी हमला कर देता है।
हारता है मानता नहीं देशकी गद्दी के लिए
अपने ही घर में वह आग लगा देता है।।
चाहे दिल्ली का ग्राउंड रामलीला हो ।
जंतर मंतर या विशाल छू मंतर हो ।
संसद भवन मकर द्वार की नौटंकी हो ।
पीएम सीएम के आवास का घेराव हो।।
देश के किसी कोने में कोई भी जमाव हो ।
तरह-तरह नारों की अचूक भरमार हो ।
सनातन धर्म के मूल्यों का तिरस्कार हो।
टुकड़े गैंग शिरफिरों का चित्कार हो।।
देश नहीं टूटता बाहरी संकट जब आता।
सैनिकों को छुपछुप कर शहीद कर जाता।
सरकारी संसाधन और सुरक्षा की आड़ में
हमारा नेता प्रजातंत्र को चुनौती दे जाता।।
आरक्षण छेड़ने पर ईट से ईंट बजा देंगे।
जरूरत पड़ गई तो सरकार को गिरा देंगे।
अपने लोगों से सबको नीचा दिखा देंगे।
मीडिया संसाधन मशीनरी को लगा देंगे।।
पुलिस अपनो पर लाठियां भांजवाता है।
आंसू गैस पानी की बौछार चलवाता है।
बसों ट्रकों में खींच खींचकर ठूसवाता है।
लेजाकर ना जाने कहां पर छुपवाता है।।
देश में नफरत की खेती पनपाया जाता।
विदेशों में देश की छवि को गिराया जाता।
विश्व में भारत की कमियां गिनाया जाता।
कुर्सी के लिए देशका गौरव गिराया जाता।
भारत के नेता यदि नफरत को छोड़ देंगे।
विकास की राजनीति को जबसे चुन लेंगे। सबसे बड़ी हार इंसानियत की तब होगी।
पक्ष विपक्ष की नहीं भ्रष्ट राजनीति होगी।।

No comments:
Post a Comment