लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सतीश कुमार को 41वें इंटरनेशनल मेडिकल साइंसेज अकादमी कॉन्फ्रेंस (IMSACON-2026) के दौरान प्रतिष्ठित इंटरनेशनल FIMSA (Fellow of International Medical Sciences Academy) Fellowship से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पुडुचेरी स्थित जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदान किया गया।
इस प्रतिष्ठित फेलोशिप से चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, रोगी सेवा और अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चुनिंदा चिकित्सकों को सम्मानित किया जाता है। डॉ. सतीश कुमार को यह सम्मान उनके उत्कृष्ट शोध कार्यों, चिकित्सा शिक्षा में योगदान, वैज्ञानिक प्रकाशनों तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका के लिए प्रदान किया गया।
इंटरनेशनल मेडिकल साइंसेज अकादमी के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सा शिक्षकों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान आधुनिक उपचार पद्धतियों, चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, चिकित्सा शिक्षा में नवाचार तथा वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
डॉ. सतीश कुमार की इस उपलब्धि से केजीएमयू और पूरे उत्तर प्रदेश के चिकित्सा जगत में हर्ष का माहौल है। उनके सहयोगियों एवं विद्यार्थियों ने इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी सक्रियता युवा चिकित्सकों एवं शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत मानी जा रही है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि केजीएमयू परिवार, गुरुजनों, सहकर्मियों और विद्यार्थियों के सहयोग एवं विश्वास का परिणाम है। उन्होंने भविष्य में भी चिकित्सा अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और बेहतर रोगी सेवाओं के माध्यम से समाज एवं देश की सेवा के लिए निरंतर कार्य करते रहने का संकल्प व्यक्त किया।
डॉ. सतीश कुमार की यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि न केवल केजीएमयू बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इससे प्रदेश के युवा चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी तथा भारतीय चिकित्सा विज्ञान की प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक मजबूत होगी।

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