वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
कलवारी, बस्ती। कुदरहा विकास क्षेत्र के चकदहा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए अवध धाम से पधारे कथा वाचक अनुराग त्रिपाठी ने भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप, नामकरण संस्कार और रामतत्व का विस्तार से वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
कथा वाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम के अवतार की महिमा सुनने और उनके बाल स्वरूप के दर्शन करने के लिए स्वयं भगवान शिव काकभुशुंडी के साथ कैलाश पर्वत से अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने भगवान के बाल रूप का दर्शन कर रामतत्व का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का प्रत्येक स्वरूप भक्तों के लिए कल्याणकारी और प्रेरणादायी है।
अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि महाराज दशरथ ने अपने चारों पुत्रों का नामकरण महर्षि वशिष्ठ के सान्निध्य में कराया था। उन्होंने कहा कि नामकरण सोलह संस्कारों में अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है और यह कार्य सदैव किसी योग्य, विद्वान एवं श्रेष्ठ व्यक्ति से ही कराया जाना चाहिए। नाम का व्यक्ति के जीवन, व्यक्तित्व और संस्कारों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे और भगवान श्रीराम के जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। अंत में श्रद्धालुओं ने आरती कर कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया।

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