गोरखपुर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तर प्रदेश की जनपद इकाई ने केंद्र सरकार से कर्मचारियों एवं पेंशनरों की वर्षों से लंबित मांगों पर मानसून सत्र में ठोस निर्णय लेने की मांग की है। परिषद का कहना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) की बहाली सहित अन्य प्रमुख मांगों को अब और टालना कर्मचारियों के हितों के साथ न्याय नहीं होगा।
इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को डिप्लोमा इंजीनियरिंग संघ भवन, लोक निर्माण विभाग परिसर में परिषद की एक आवश्यक बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव तथा संचालन जिला महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने किया।
बैठक में कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करते हुए केंद्र सरकार से मांग की गई कि मानसून सत्र में पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) को पुनः लागू किया जाए, आठवें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन ₹69 हजार निर्धारित किया जाए, 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते को मूल वेतन में समाहित किया जाए, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के अंतर्गत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, कोरोना काल में फ्रीज किए गए लगभग डेढ़ वर्ष के महंगाई भत्ते के एरियर का भुगतान किया जाए तथा वरिष्ठ नागरिक पेंशनरों को रेलवे किराए में पूर्ववत रियायत बहाल की जाए।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव ने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं। केंद्र सरकार को इन मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाते हुए मानसून सत्र में सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की उपेक्षा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने कर्मचारियों और पेंशनरों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। ऐसे में सरकार को उनकी न्यायोचित मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
बैठक में गोविंद जी, अशोक पांडेय, पंडित श्याम नारायण शुक्ल, राजेश सिंह, अनिल द्विवेदी, अनूप कुमार, बंटी श्रीवास्तव, सौरभ श्रीवास्तव, राजेश मिश्रा, सुभाष पांडेय, इजहार अली, निसार अहमद, रामधनी पासवान सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

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