गोरखपुर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) ने किसानों, कृषि मजदूरों एवं ग्रामीण भारत से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। संगठन ने किसानों की आय, कृषि सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
महानगर अध्यक्ष सतीश चंद्र ओझा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि देश का किसान लगातार बढ़ती खेती की लागत, फसलों का लाभकारी मूल्य न मिलने, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, महंगे कृषि संसाधनों तथा प्राकृतिक आपदाओं के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहा है। संगठन ने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े नीतिगत फैसलों और प्रस्तावित व्यापार समझौतों का सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है, इसलिए किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
ज्ञापन में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी, गन्ना मूल्य में वृद्धि एवं बकाया भुगतान, किसानों व कृषि मजदूरों की संपूर्ण कर्जमाफी, कृषि कार्य के लिए निःशुल्क बिजली, ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, स्मार्ट मीटर एवं बिजली निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने, मनरेगा के तहत 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को त्वरित एवं पर्याप्त मुआवजा, पारदर्शी फसल बीमा योजना, भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का सख्ती से पालन, डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के आयात पर रोक तथा कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार के माध्यम से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की भी मांग उठाई गई।
भारतीय किसान यूनियन ने कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया तो इसका प्रतिकूल प्रभाव देश की खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। संगठन ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर किसानों के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

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