बस्ती। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद की मंगलवार को स्काउट भवन में आयोजित बैठक में तदर्थ प्रधानाचार्यों के स्थायीकरण सहित विभिन्न लंबित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। परिषद के पदाधिकारियों ने तदर्थ प्रधानाचार्यों के स्थायीकरण के लिए हर स्तर पर प्रयास जारी रखने का संकल्प दोहराया।
परिषद के संरक्षक डॉ. संजय सिंह, जिलाध्यक्ष योगेश शुक्ल एवं मंत्री डॉ. हरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि परिषद का शीर्ष नेतृत्व सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी, उमेश द्विवेदी, अवनीश सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा मंत्री के समक्ष यह विषय उठा चुका है। उन्होंने कहा कि तदर्थ प्रधानाचार्यों के स्थायीकरण से सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
बैठक में यह भी कहा गया कि इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट-1921 के प्रावधानों एवं उच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों के बावजूद कार्यरत प्रधानाचार्यों को निर्धारित समान वेतन नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में शीघ्र ही जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) से वार्ता करने का निर्णय लिया गया।
कार्यकारी अध्यक्ष आज्ञाराम चौधरी, कोषाध्यक्ष विद्याधर वर्मा, उपाध्यक्ष डॉ. मनोज सिंह, डॉ. के.डी. द्विवेदी, संजय कुमार द्विवेदी, धर्मेंद्र कुमार एवं मनोज कुमार सिंह ने कहा कि स्थायीकरण से प्रधानाचार्यों का मनोबल बढ़ेगा और विद्यालयों में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार होगा।
संयुक्त मंत्री डॉ. प्रमोद उपाध्याय, संगठन मंत्री रामप्रीत यादव, कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अरुण मिश्र, कौशलेंद्र मिश्र एवं अरविन्द त्रिपाठी ने कुछ उच्चाधिकारियों के नकारात्मक रवैये को इस मांग के लंबित रहने का कारण बताया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विधायकों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार पर तदर्थ प्रधानाचार्यों के स्थायीकरण के लिए सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया जाएगा।
बैठक में वीरेंद्र सिंह, सर्वेन्द्र नारायण द्विवेदी, विजय कुमार, राम सहाय, राम बचन, संतोष पाण्डेय, विनोद प्रकाश वर्मा, सुनील पाण्डेय, सुधीर कुमार, राम भवन, राकेश शर्मा एवं चन्द्रशेखर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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