बस्ती। पैकोलिया थाना क्षेत्र के मुईली गांव में पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद मंगलवार को हिंसक संघर्ष में बदल गया। खेत की जुताई और धान की रोपाई को लेकर हुए विवाद में एक ही परिवार के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विरोध करने पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया गया, जिसमें पति-पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनके बेटे और बेटी को भी चोटें आईं। पुलिस ने मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं होने पर शिवसेना ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
पीड़िता लक्ष्मी देवी पत्नी छोटेलाल के अनुसार, उनके पति और उनके तीन भाइयों के बीच पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। आरोप है कि 7 जुलाई की शाम करीब पांच बजे गाटा संख्या 125 व 642 में विपक्षी पक्ष जबरन खेत की जुताई कराकर धान की रोपाई करा रहा था। विरोध करने पहुंचे उनके बेटे विशाल और बेटी रोशनी के साथ पहले गाली-गलौज की गई और फिर मारपीट की गई। सूचना मिलने पर जब लक्ष्मी देवी और उनके पति छोटेलाल मौके पर पहुंचे तो उन पर भी हमला कर दिया गया।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हमलावरों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दोनों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। शोर-शराबा सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। घायलों को एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हर्रैया में भर्ती कराया गया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान उनके बेटे विशाल का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया, जिसमें पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग थी।
पुलिस ने पीड़िता की तहरीर के आधार पर नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि घटना के कई दिन बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित परिवार में नाराजगी है।
शिवसेना के जिला प्रभारी प्रमोद पाण्डेय ने कहा कि पीड़ित परिवार संगठन से जुड़ा हुआ है। यदि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो यह कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने मांग की कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। साथ ही चेतावनी दी कि शीघ्र कार्रवाई न होने पर शिवसेना आंदोलन करेगी।
पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी लगातार धमकियां दे रहे हैं, जिससे परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

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