गोरखपुर। विक्रम संवत् 2083 एवं शाके 1948 के अनुसार पवित्र श्रावण मास 30 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। विद्वत् जनकल्याण समिति के महामंत्री एवं श्री हनुमत ज्योतिष सेवा संघ के संस्थापक ज्योतिषाचार्य पं. बृजेश पाण्डेय ने बताया कि भगवान शिव की आराधना के लिए श्रावण मास अत्यंत पावन एवं फलदायी माना जाता है। इस माह में श्रद्धालु जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजन तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं।
उन्होंने बताया कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी पर पुनः जागृत होते हैं। इस अवधि में सृष्टि के पालन का दायित्व भगवान शिव के हाथों में रहने के कारण श्रावण मास का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।
पं. बृजेश पाण्डेय के अनुसार श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग पूजन, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र, विष्णु सहस्रनाम एवं नवग्रह मंत्रों का जाप विशेष पुण्यदायी होता है। इससे रोग, शोक, भय, ग्रहबाधा एवं मानसिक तनाव दूर होकर सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष सावन में चार पवित्र सोमवार पड़ रहे हैं, जो 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को होंगे। इन दिनों श्रद्धालु शिवालयों में जल, दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा एवं पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
उन्होंने बताया कि श्रद्धालु अपनी कामना के अनुसार भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं। सर्वकामना सिद्धि के लिए गाय के दूध से, धन-लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए गन्ने के रस एवं गुड़ से, शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए सरसों के तेल से, आकर्षण एवं सौहार्द के लिए शहद से तथा रोग निवारण के लिए कुशोदक से अभिषेक करना शुभ माना गया है।
श्रावण मास में महिलाओं एवं अविवाहित कन्याओं को चार सोमवार व्रत करने का विशेष अवसर मिलेगा। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति तथा विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन के लिए शिव-गौरी पूजन करेंगी। इस दौरान पड़ने वाले चार मंगलागौरी व्रत भी विशेष फलदायी माने गए हैं।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि श्रावण मास में शिववास का विचार नहीं किया जाता, इसलिए पूरे सावन में किसी भी दिन शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक किया जा सकता है। 28 अगस्त 2026 को श्रावण मास का समापन होगा। इसी दिन रक्षाबंधन एवं श्रावणी उपाकर्म का पावन पर्व भी पूरे दिन शुभ मुहूर्त में मनाया जाएगा।

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