गोरखपुर। टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा एवं सम्मान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ गोरखपुर ने सांसद संपर्क एवं सांसद समर्थन अभियान शुरू कर दिया है। यह अभियान अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ एवं राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन के द्वितीय चरण के अंतर्गत चलाया जा रहा है।
जिला संयोजक जयप्रकाश मद्धेशिया ने कहा कि टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों ने वर्षों तक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने का कार्य किया है। ऐसे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर संकट उत्पन्न होना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि संगठन जनप्रतिनिधियों के समक्ष इस विषय को मजबूती से उठाएगा और सांसदों से आगामी संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाकर न्यायोचित समाधान का मार्ग प्रशस्त करने का अनुरोध करेगा।
उन्होंने कहा कि यह केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका, सम्मान और भविष्य से जुड़ा विषय है। नियुक्ति के समय लागू नियमों के आधार पर सेवा ग्रहण करने वाले शिक्षकों के साथ नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप व्यवहार किया जाना चाहिए।
जिला सहसंयोजक महेंद्र कुमार पटेल ने सभी शिक्षकों से सांसद संपर्क अभियान में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ही शिक्षकों की समस्याओं को संसद तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक का दायित्व है कि वह इस अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे।
जिला सहसंयोजक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना उनकी सेवा सुरक्षा, मानवीय गरिमा और नैसर्गिक न्याय की भावना के प्रतिकूल है। संगठन सांसदों को ज्ञापन सौंपकर उनका समर्थन प्राप्त करेगा और शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संसद में विषय उठाने का आग्रह करेगा।
महासंघ ने निर्णय लिया है कि 5 जुलाई 2026 तक जनपद के सभी संबंधित सांसदों से संपर्क कर उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा तथा शिक्षक हित में उनका समर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। संगठन ने सभी शिक्षक साथियों से अभियान को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर सहभागिता करने का आह्वान किया है।

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