वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
बस्ती। जनपद में मनोरमा नदी की बदहाल स्थिति को लेकर चल रहा जनसंघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। तीन दिनों से कलेक्ट्रेट परिसर में धरनारत भाजपा नेता व पूर्व विधानसभा प्रत्याशी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा ने जिलाधिकारी को कड़ा आपत्ति पत्र सौंपते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि Central Pollution Control Board (CPCB) की जांच रिपोर्ट में मनोरमा नदी का जल नहाने योग्य तक नहीं पाया गया है, जो जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस एवं प्रभावी कदम न उठाया जाना घोर लापरवाही को दर्शाता है।
CPCB द्वारा दिए गए निर्देश—सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थापना, नालों के प्रदूषित जल को रोकना व बायो-रिमेडिएशन, नदी की सफाई (डिसिल्टिंग) तथा जल गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग—अब तक कागजों तक ही सीमित हैं।
सुदामा ने कहा कि यह केवल एक नदी नहीं, बल्कि चार सौ से अधिक गांवों और दो लाख से अधिक लोगों के जीवन का प्रश्न है, जो आज विषाक्त जल पीने को विवश हैं। उन्होंने हरीश द्विवेदी, विवेकानन्द मिश्र, अजय सिंह, कवीन्द्र चौधरी, दूधराम एवं रामप्रसाद चौधरी से जनहित में हस्तक्षेप करने और प्रशासन पर दबाव बनाने की अपील की है।
आंदोलन की अगली रणनीति तय करते हुए उन्होंने बताया कि तीन दिनों के क्रमिक धरने के बाद अब प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक तीन दिवसीय भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। यदि इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार को अगली रणनीति की घोषणा की जाएगी।
इस मौके पर देवशरण शुक्ल, अनिल तिवारी, दिग्विजय पाण्डेय, अभिषेक शर्मा, प्रमोद तिवारी, राजीव पाण्डेय, महेंद्र सिंह, राहुल शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने आम जनमानस से इस लड़ाई में जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि “मनोरमा बचेगी, तभी जीवन बचेगा।”

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