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Tuesday, March 10, 2026

शुकदेव-परीक्षित संवाद सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु


महादेवा (बस्ती)। विकास क्षेत्र बनकटी के महादेवा गाँव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे कथावाचक पंडित धीरज कृष्ण शास्त्री ने राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म सहित कई प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथावाचक शास्त्री जी ने शुकदेव-परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि एक बार राजा परीक्षित वन में गए, जहां उन्हें प्यास लगी। उन्होंने समीख ऋषि से पानी मांगा, लेकिन ऋषि उस समय समाधि में लीन थे, इसलिए वे पानी नहीं दे सके। इसे अपना अपमान समझकर राजा परीक्षित ने एक मरा हुआ सांप उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया।
यह घटना पास में खेल रहे बच्चों ने समीख ऋषि के पुत्र को बताई। क्रोधित होकर ऋषि के पुत्र ने राजा परीक्षित को शाप दिया कि सातवें दिन तक्षक नामक सर्प आकर उन्हें जलाकर भस्म कर देगा। जब समीख ऋषि को यह बात ज्ञात हुई तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और उनसे यह अपराध कलियुग के प्रभाव में हुआ है।
समीख ऋषि ने जब यह सूचना राजा परीक्षित को दी, तो उन्होंने अपना राज्य पुत्र जन्मेजय को सौंप दिया और गंगा नदी के तट पर पहुंच गए। वहां अनेक ऋषि-मुनि और देवता एकत्र हुए। अंत में व्यास नंदन शुकदेव वहां पहुंचे, जिनका सभी ने खड़े होकर स्वागत किया।
कथा के दौरान मुख्य यजमान ओम प्रकाश सिंह व उनकी पत्नी बेबी सिंह सहित गांव एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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