वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
गोरखपुर। दलित चिंतक एवं सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर बृजमोहन ने महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की 129वीं पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण की जननी थीं। उन्होंने ऐसे समय में समाज में परिवर्तन की अलख जगाई, जब महिलाओं और दलितों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार भी नहीं था।
इंजीनियर बृजमोहन ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने समाज में फैली जाति व्यवस्था, लैंगिक भेदभाव और कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए महिलाओं की शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने 1848 में मात्र नौ छात्राओं के साथ लड़कियों के लिए पहला विद्यालय शुरू किया, जो आगे चलकर कई विद्यालयों तक विस्तारित हुआ। उस दौर में उन्हें सामाजिक विरोध, अपमान और हमलों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं के अधिकारों के लिए 1852 में महिला सेवा मंडल की स्थापना की तथा विधवाओं और पीड़ित महिलाओं के लिए बालहत्या प्रतिबंधक गृह भी शुरू किया। वे आत्मनिर्भरता की प्रबल समर्थक थीं और समाज में व्याप्त रूढ़ियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाती थीं।
इंजीनियर बृजमोहन ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन महिलाओं, दलितों और वंचित वर्गों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने लेखन और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज में समानता, शिक्षा और मानवता का संदेश दिया। प्लेग महामारी के दौरान मरीजों की सेवा करते हुए 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी समाज को दिशा दे रहे हैं।

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