गोरखपुर। भारतीय रेल में ट्रेनों के सुरक्षित एवं संरक्षित संचालन के लिए ‘कवच’ सिस्टम को प्राथमिकता के आधार पर लगाया जा रहा है। इसी क्रम में पूर्वोत्तर रेलवे में भी रेल संरक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कवच सिस्टम स्थापित किया जा रहा है।
कवच सिस्टम एक जटिल तकनीक है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर केबल, टेलीकॉम टावर, स्टेशन डेटा सेंटर, ट्रैक साइड इक्विपमेंट तथा ऑनबोर्ड लोकोमोटिव सिस्टम सहित पाँच प्रमुख सबसिस्टम शामिल हैं। इसके दो मुख्य घटक होते हैं। पहला ‘ऑन बोर्ड इक्विपमेंट’ (लोको कवच), जिसमें वाइटल कंप्यूटर, ब्रेक इंटरफेस यूनिट, लोको पायलट मशीन इंटरफेस, आरएफआईडी रीडर, पल्स जेनरेटर और रेडियो एंटीना लगाए जाते हैं। दूसरा ‘ट्रैक साइड’ या स्टेशनरी कवच यूनिट है, जिसमें स्टेशन मास्टर ऑपरेशन कम इंडिकेशन पैनल, कंक्रीट स्लीपरों पर आरएफआईडी टैग तथा लगभग 40 मीटर ऊँचे टावर और एंटीना लगाए जाते हैं। प्रत्येक एक किलोमीटर पर दो आरएफआईडी टैग का एक सेट लगाया जाता है, जबकि स्टेशन यार्डों में प्रत्येक सिग्नल के लिए आरएफआईडी टैग स्थापित किया जाता है।
स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को पूर्वोत्तर रेलवे के 1,441 रूट किलोमीटर पर स्थापित करने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा 492.21 करोड़ रुपये की लागत से पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इसके तहत लखनऊ मंडल में लखनऊ जंक्शन–मानक नगर, लखनऊ जंक्शन–मल्हौर, बाराबंकी जंक्शन–बुढ़वल जंक्शन, सीतापुर सिटी–बुढ़वल जंक्शन और बुढ़वल जंक्शन–गोरखपुर कैंट खंड; वाराणसी मंडल में गोरखपुर कैंट–गोल्डिनगंज, गोरखपुर कैंट–वाल्मीकिनगर रोड, भटनी जंक्शन–वाराणसी जंक्शन, वाराणसी जंक्शन–प्रयागराज जंक्शन तथा औंड़िहार जंक्शन–छपरा जंक्शन; और इज्जतनगर मंडल में रावतपुर–फर्रूखाबाद जंक्शन, फर्रूखाबाद जंक्शन–कासगंज जंक्शन तथा कासगंज जंक्शन–मथुरा जंक्शन खंडों पर कवच प्रणाली लगाने का कार्य स्वीकृत किया गया है।
प्रथम चरण में पूर्वोत्तर रेलवे के 551 रूट किलोमीटर प्रमुख रेलमार्गों पर कवच प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसमें लखनऊ मंडल के सीतापुर सिटी–बुढ़वल जंक्शन, बुढ़वल जंक्शन–गोरखपुर कैंट, मानक नगर–लखनऊ जंक्शन–मल्हौर तथा बाराबंकी–बुढ़वल जंक्शन और वाराणसी मंडल के गोरखपुर कैंट–गोल्डिनगंज खंड शामिल हैं। इन खंडों पर कुल 108 टावर लगाए जाएंगे, जिनका सर्वे कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में मुख्य मार्ग छपरा–बाराबंकी में टावर लगाने का कार्य प्रगति पर है, जबकि गोरखपुर–बस्ती खंड में 20 टावर स्थापित किए जा चुके हैं।

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