बस्ती । उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के चुनाव को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। इस मामले में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया गया है। इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच और सही तथ्यों से निदेशक पंचायतीराज को अवगत कराये जाने की मांग किया गया है।
शिकायत के अनुसार संघ के प्रांतीय कार्यालय द्वारा 17 दिसम्बर 2025 को जारी पत्र के माध्यम से जनपद बस्ती में द्विवार्षिक अधिवेशन चुनाव कराने हेतु सिद्धार्थनगर के जिला अध्यक्ष रणजीत कुमार को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया था। आरोप है कि 25 दिसम्बर 2025 को होने वाले नामांकन की सूचना न तो सार्वजनिक रूप से जारी की गई और न ही स्थान की जानकारी दी गई। साथ ही जिला मंत्री मनोज चौहान, कोषाध्यक्ष पेशकार और संगठन मंत्री रामकृपाल चौधरी सहित कई पदाधिकारियों को भी नामांकन की जानकारी नहीं दी गई और न तो कार्यकारिणी को भंग किया गया था।
शिकायत में कहा गया है कि 24 दिसम्बर 2025 को जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय बस्ती में प्रदेश संगठन से आए पत्र को प्राप्त कराने के बाद 25 दिसम्बर को बंद कमरे में नामांकन प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इस प्रक्रिया की जानकारी न तो किसी समाचार पत्र में प्रकाशित की गई और न ही व्हाट्सएप समूहों में साझा की गई। साथ ही चुनाव के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी से अनुमति लेने और जिले के सफाई कर्मचारियों की सत्यापित सूची मंगाने की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई।
बताया गया कि इस घटनाक्रम से कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद सफाई कर्मचारी संघ ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, डीपीआरओ एवं समस्त एडीओ पंचायत को सूचना देते हुए अटल बिहारी प्रेक्षागृह में मतदान कराने के साथ ही मानकों के साथ चुनाव सपन्न कराया गया। इसमें 1681 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और अध्यक्ष पद पर पेशकार, मंत्री पद पर अतुल कुमार पाण्डेय, कोषाध्यक्ष पद पर रामकृपाल चौधरी, जिला संगठन मंत्री पद पर मोहम्मद सलीम तथा लेखा समप्रेक्षक पद पर राजकुमार का चयन किया गया। हालांकि प्रदेश कार्यकारिणी ने इस चुनाव को मान्यता देने से इनकार कर दिया है।
अतुल कुमार पाण्डेय ने बताया कि पूरे मामले की शिकायत 10 मार्च को डीपीआरओ से की गई तथा 11 मार्च को मुख्य विकास अधिकारी से मिलकर जांच की मांग की गई। उन्होंने डीपीआरओ को जांच कर आख्या देने के निर्देश दिए थे, लेकिन आरोप है कि उसके बाद भी डीपीआरओ द्वारा विवादित सूची शासन को भेज दी गई। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

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