लखनऊ। केंद्रीय बजट 2026-27 में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी इस बार 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। पिछले वित्त वर्ष में केंद्र सरकार से राज्य को विभिन्न मदों में करीब 3.92 लाख करोड़ रुपये की सहायता और आवंटन प्राप्त हुआ था। यदि इस बार औसतन 8 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो यूपी को 4.10 लाख करोड़ से 4.25 लाख करोड़ रुपये तक मिलने का अनुमान जताया जा रहा है।
इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने बजट से पहले केंद्र के सामने कई अहम प्रस्ताव रखे हैं। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बजट पूर्व बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उत्तर प्रदेश के लिए 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं की मांग की है।
- मेट्रो विस्तार के लिए 32,075 करोड़ की मांग
प्रदेश सरकार ने लखनऊ, कानपुर, आगरा के साथ-साथ नए शहरों में मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार हेतु 32,075 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मांगी है। इसके अलावा उत्तर-दक्षिण एक्सप्रेस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने और लखनऊ हाईकोर्ट की खंडपीठ से पश्चिमी यूपी को जोड़ने जैसे प्रशासनिक प्रस्ताव भी केंद्र के समक्ष रखे गए हैं।
- जल जीवन मिशन में अतिरिक्त 33,750 करोड़ का प्रस्ताव
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन के तहत 33,750 करोड़ रुपये के अतिरिक्त अनुदान की मांग की गई है। साथ ही प्रदेश के 60 हजार तालाबों के पुनरुद्धार और भूजल पुनर्भरण के लिए 6,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी केंद्र को सौंपा गया है।
- ऊर्जा क्षेत्र में सौर परियोजनाओं को बढ़ावा
ऊर्जा क्षेत्र में सौर अनुसंधान केंद्र की स्थापना और 17 नगर निगमों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए 1005 करोड़ रुपये की मांग की गई है। सरकार का उद्देश्य नगरीय निकायों की बिजली लागत घटाने के साथ हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
- शिक्षा-स्वास्थ्य में एम्स, आईआईटी और नए स्कूलों की मांग
प्रदेश सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स और बुंदेलखंड में आईआईटी की स्थापना की मांग रखी है। इसके साथ ही हर तहसील में नवोदय विद्यालय तथा प्रधानमंत्री श्री विद्यालय योजना के तहत 797 नए विद्यालयों के लिए 655 करोड़ रुपये की मांग भी की गई है। महिला सशक्तिकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रशिक्षण योजना का प्रस्ताव भी केंद्र के सामने रखा गया है।
- वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर
राज्य सरकार ने केंद्र से दो प्रमुख आर्थिक मांगें भी उठाई हैं - केंद्रीय करों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए।राज्यों को पूंजीगत परियोजनाओं के लिए दी जाने वाली विशेष सहायता योजना का बजट बढ़ाकर 1.5 लाख करोड़ रुपये किया जाए, ताकि यूपी को बड़े आधारभूत ढांचा कार्यों के लिए अधिक धनराशि मिल सके।प्रदेश सरकार का कहना है कि यदि केंद्र से इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो यूपी में इंफ्रास्ट्रक्चर, जल आपूर्ति, ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।
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