गोरखपुर। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित 'पंचपदी अधिगम पद्धति चयनित शिक्षार्थी अभ्यास कार्यशाला' का समापन सत्र आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यशाला पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं पूर्व क्षेत्र के शिक्षार्थियों के लिए सरस्वती शिशु मंदिर (10+2)पक्कीबाग, गोरखपुर में आयोजित की गई थी।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि डी. रामकृष्ण राव, (उपाध्यक्ष विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान ) ने शिक्षार्थियों को संबोधित किया।
श्री राव ने अपने उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित 'पंचपदी अधिगम पद्धति' के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पद्धति केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर बच्चों के सर्वांगीण विकास—शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, और आध्यात्मिक—पर बल देती है। उन्होंने शिक्षकों से इस पद्धति को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कक्षाओं में लागू करने का आह्वान किया, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सके। साथ ही उन्होंने कहा व्यक्ति जीवन भर सीखते रहता है। चरित्र निर्माण के लिए एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हमें हर दिन नित्य नई-नई चीजों को सिखाना होगा। हम जो भी बच्चों को सीखाते एवं बताते हैं वह समझ में दिखाई देता है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य चयनित शिक्षार्थियों को पंचपदी के पाँच चरणों—अधिगम, बोध, अभ्यास, प्रयोग, और प्रचार—का गहन प्रशिक्षण देना था। सत्र के दौरान, प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से विभिन्न अभ्यास सत्रों में भाग लिया, जिससे उन्हें प्रभावी शिक्षण विधियों और छात्र-केंद्रित शिक्षा के सिद्धांतों को समझने में मदद मिली।
यह कार्यशाला पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं पूर्व क्षेत्र में विद्या भारती के विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम संचालन मिथिलेश कुमार अवस्थी प्रदेश निरीक्षक जन शिक्षा समिति अवध प्रांत एवं आभार ज्ञापन कमलेश सिंह सह प्रशिक्षण प्रमुख ने किया।
इस अवसर पर दिनेश सिंह प्रशिक्षण प्रमुख, जियालाल जी प्रदेश निरीक्षक, डॉक्टर राजेश सिंह प्रधानाचार्य सहित अनेक शिक्षाविद उपस्थित रहे।
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