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Monday, July 4, 2022

120वीं पुण्य तिथि पर याद किये गये स्वामी विवेकानन्द

 बस्ती । समूचे विश्व में भारत की ज्ञान पताका फहराने वाले स्वामी विवेकानन्द को उनके 120 वीं पुण्य तिथि पर सोमवार को प्रेमचन्द्र साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा याद किया गया। कलेक्ट्रेट परिसर में वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 4 जुलाई 1902 को 39 वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानन्द आसमयिक मृत्यु हुई थी।  उनके जीवन और उनके संदेश युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होने 25 साल की उम्र में ही मोह माया को छोड़कर सन्यास ले लिया था।

होम्योपैथ के वरिष्ठ चिकित्सक एवं साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने स्वामी विवेकानन्द के जीव़न वृत्त पर प्रकाश डालते हुये कहा कि विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में ऐतिहासिक भाषण दिया और अपने ओज पूर्ण भाषणों से युवाओं में काफी लोकप्रिय भी हुए। स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार जीवन में ऊर्जा और जोश का संचार करते हैं। अपने विचारों से लोगों की जिंदगी को रोशन करने वाले स्वामी विवेकानंद भारत के महान पुरुषों में से एक है। उनका बेहद साधारण जीवन और उनके महान विचार सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

अध्यक्षता करते हुये सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि नयी पीढी़ को स्वामी जी के विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिये। उन्होने ऐसे समय पर भारत को जगाया जब देश अनेक मोर्चो पर विषम परिस्थितियों से गुजर रहा था। शिकागों का उनका भाषण ऐतिहासिक दस्तावेज है। श्याम प्रकाश शर्मा एडवोकेट ने कहा कि  स्वामी विवेकानंद ने गुरु रामकृष्ण परमहंस के नेतृत्व में आध्यात्म की शिक्षा ली और वो प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु बन गएं। विवेकानंद ने अपने गुरु के नाम पर एक मई 1897 में कोलकाता में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। मिशन की स्थापना का उद्देश्य वेदांत दर्शन का प्रचार-प्रसार और सेवा करना है।

इसी क्रम में प्रेमचन्द्र साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा डा. वी.के. वर्मा, बी.के. मिश्र, चन्द्रबली मिश्र, राजेश प्रताप सिंह ‘बागी’ को उनके योगदान के लिये सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में बी.के. मिश्र, ओमप्रकाश नाथ मिश्र, विनय कुमार श्रीवास्तव, राजेश प्रताप बागी, पेशकार मिश्र, त्रिभुवन प्रसाद मिश्र, चन्द्रबली मिश्र, सामईन फारूकी आदि ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला। मुख्य रूप से सन्तोष कुमार श्रीवास्तव, रंगीलाल, गणेश, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, लालजी पाण्डेय, दीनानाथ यादव आदि उपस्थित रहे।


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