लखनऊ। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने और रेलवे परिसरों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ‘ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह’ के तहत एक से सात नवंबर तक आयोजित हो रहे इस अभियान के क्रम में शुक्रवार को मंडल के नौ रेलवे स्टेशनों पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से यात्रियों, रेलकर्मियों और सफाई कर्मचारियों को ई-वेस्ट के उचित प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया।
मंडल रेल प्रबंधक गौरव अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (ईएनएचएम) महेंद्र सिंह के नेतृत्व में ऐशबाग जंक्शन पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें यात्रियों, रेलकर्मियों, सफाई मित्रों और खानपान विक्रेताओं को अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जिम्मेदारीपूर्वक निस्तारण करने तथा उनकी मरम्मत और पुनः उपयोग को प्राथमिकता देने की जानकारी दी गई। लोगों से ई-वेस्ट को इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित संग्रहण केंद्रों तक पहुंचाने की अपील की गई।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के तीन मूल मंत्र 3R यानी रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल के महत्व को समझाया गया। साथ ही सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान जागरूकता पम्पलेट वितरित कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई।
अभियान के तहत ऐशबाग, लखनऊ जंक्शन, मैलानी, बस्ती, बादशाहनगर, सीतापुर, खलीलाबाद, गोंडा और गोरखपुर रेलवे स्टेशनों पर संविदा सफाई कर्मचारियों ने जागरूकता रैली निकालकर यात्रियों को जागरूक किया। स्टेशनों पर बैनर, पोस्टर और यात्री उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से भी अभियान का प्रचार-प्रसार किया गया। खानपान विक्रेताओं को कपड़े के थैले वितरित कर प्लास्टिक के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने का संदेश दिया गया।
वहीं, गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर संविदा श्रमिकों ने लघु नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ई-वेस्ट के दुष्प्रभावों, उसके वैज्ञानिक निस्तारण और प्लास्टिक प्रदूषण से बचाव का संदेश दिया। रेल प्रशासन का मानना है कि छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलावों और सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को प्रभावी बनाया जा सकता है।
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने रेल यात्रियों, कर्मचारियों और आमजन से अपील की है कि वे ई-वेस्ट का उचित प्रबंधन करें, सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी बनाएं और स्वच्छ एवं हरित रेलवे परिसर बनाने में अपना योगदान दें।

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