आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी
सर्वदेवमयं लिंगं सर्वदेवमयः शिवः।
तस्मात् सर्वप्रयत्नेन पूजयेच्छङ्करं सदा॥
अर्थ:
"भगवान शिव का शिवलिंग सभी देवताओं का स्वरूप है और स्वयं शिव भी सभी देवताओं से युक्त हैं। इसलिए, मनुष्य को हमेशा सभी प्रकार के प्रयत्नों (पूरी श्रद्धा और सामर्थ्य) से सदैव भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए।"
शिवलिंगं सर्व देवानाम अवाहनाम पूजंम करिष्योति।
यह श्लोक (या मंत्र का अंश) भगवान शिव की महिमा और पूजा के संकल्प को दर्शाता है। इसका सरल और भावपूर्ण अर्थ इस प्रकार है:
"शिवलिंग के रूप में मैं समस्त देवी- देवताओं का आवाहन (आमंत्रण) करता हूँ और उनका पूजन करता हूँ।"
सनातन धर्म और शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग को समस्त ब्रह्मांड और सभी शक्तियों का केंद्र माना गया है। ऐसा विश्वास है कि शिवलिंग की पूजा करने से ब्रह्मांड के सभी देवी-देवताओं की पूजा का फल स्वतः ही प्राप्त हो जाता है, क्योंकि संपूर्ण सृष्टि और सभी देवता शिव में ही समाहित हैं।
शिवलिंग में सभी देवों का वास-
शिवलिंग को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित माना जाता है, जो त्रिदेवों और पूरी सृष्टि का प्रतिनिधित्व करते हैं:
निचला भाग (ब्रह्मा):-
शिवलिंग का सबसे निचला हिस्सा जो जमीन से जुड़ा होता है, वह सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का प्रतीक है।
मध्य भाग (विष्णु): -
शिवलिंग का बीच का हिस्सा (पीठिका या जलहरी) सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु का प्रतीक है।
ऊपरी भाग (शिव): -
शिवलिंग का सबसे ऊपरी गोलाकार भाग सृष्टि के संहारक और पुनरुद्धारक भगवान शिव का प्रतीक है।
ऊर्जा (माता पार्वती): -
जिस वेदी पर शिवलिंग स्थापित होता है, वह माता शक्ति (पार्वती) का प्रतीक है।
इस प्रकार, जब आप शिवलिंग की पूजा और आवाहन करते हैं, तो अनजाने में ही पूरी सृष्टि और सभी देवी-देवताओं की पूजा एक साथ संपन्न हो जाती है।
संक्षिप्त पूजन एवं आवाहन विधि:-
यदि आप शिवलिंग पर सभी देवों की उपस्थिति मानकर पूजन (आवाहन और पूजन) करना चाहते हैं, तो इस सरल क्रम का पालन कर सकते हैं:
1. आवाहन (Invocation):-
हाथ में अक्षत (चावल) और पुष्प लेकर भगवान शिव और शिवलिंग में समाहित सभी देवी-देवताओं का ध्यान करें और उन्हें वेदी पर विराजमान होने की प्रार्थना करें।
2. अभिषेक (Abhishek):-
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए शुद्ध जल, गंगाजल, या पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से शिवलिंग का अभिषेक करें।
3. वस्त्र और उपवीत:-
महादेव को कलावा (मौली) और जनेऊ अर्पित करें।
4. चंदन और त्रिपुंड:-
शिवलिंग पर सफेद या पीला चंदन लगाएं और तीन रेखाओं वाला त्रिपुंड बनाएं।
5. ऋतु फल और पत्र: -
भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और भस्म अर्पित करें।
6. धूप-दीप और नैवेद्य: -
धूप और दीपक जलाकर भगवान को फल, मिठाई या पंचामृत का भोग लगाएं।
7. आरती और क्षमा प्रार्थना: -
कर्पूर जलाकर शिव जी की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
No comments:
Post a Comment