वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
बस्ती। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, यूजीसी के नए कानून की वापसी सहित सात सूत्रीय मांगों को लेकर मेधा पार्टी का गांधीकला भवन परिसर स्थित बापू प्रतिमा के निकट चल रहा धरना रविवार को 42वें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर आंदोलनकारियों ने पितृ पक्ष के दौरान अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए अपने प्राण गंवाने वाले ज्ञात-अज्ञात लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद लोगों को चिउरा-दही खिलाया गया।
मेधा पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि 42 दिन से धरना चलने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। इससे सरकार की निष्ठुरता उजागर होती है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक मेधा का धरना अनवरत जारी रहेगा। केंद्र सरकार की चुप्पी छात्र विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने भाजपा सरकार पर समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश का छात्र इसे समझ चुका है। यूजीसी के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी आने वाले चुनावों में भारी पड़ेगी।
मेधा पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पं. सुनील भट्ट ने कहा कि शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय का लक्ष्य हासिल करने के लिए पार्टी लगातार संघर्ष करती रहेगी। गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा और उनके अधिकार दिलाने के लिए आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी में नया कानून लाकर केंद्र सरकार छात्रों को जाति और धर्म में बांटने का प्रयास कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून वापस नहीं लिया गया तो देश को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
धरने में उमेश पाण्डेय मुन्ना, संतोष शुक्ल, विशाल सिंह, दीपक शुक्ला, वृजेश द्विवेदी, अजय कुमार चौधरी, राहुल त्रिपाठी, रामरीका पाण्डेय, अंशू चौरसिया, विपुल सिंह, प्रतिमा श्रीवास्तव, शांती श्रीवास्तव, वृजेश कुमार श्रीवास्तव, अनूप कुमार श्रीवास्तव, मनोज कुमार सिंह, रत्नेश श्रीवास्तव, डा. सौरभ सिन्हा, जर्नादन प्रसाद गुप्ता, रनदीप माथुर सहित मेधा के पदाधिकारी, सदस्य और विभिन्न संगठनों के लोग मौजूद रहे।

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