वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
बस्ती। सोनहा थाना पुलिस द्वारा बरामद की गई नाबालिग बालिका को नियमानुसार न्याय पीठ बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष तत्काल प्रस्तुत करने के बजाय थाना परिसर में एक दिन और रात रोके जाने का मामला सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने सोनहा थानाध्यक्ष और थाना बाल कल्याण अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। दोनों अधिकारियों को अपना स्पष्टीकरण 14 सितंबर तक प्रस्तुत करने का समय दिया गया है।
बताया गया कि सोनहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने अपनी पुत्री के घर से गायब होने के संबंध में थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद बालिका को बरामद कर लिया। नियमानुसार बरामदगी के बाद बालिका को न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर आवश्यक मेडिकल सहित अन्य विधिक प्रक्रिया पूरी की जानी थी, लेकिन पुलिस ने तत्काल समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के बजाय बालिका को सात सितंबर को दिन और रात थाना परिसर में रोके रखा। इसके बाद आठ सितंबर को उसे सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
काउंसलिंग के दौरान बालिका ने न्याय पीठ के समक्ष बताया कि वह पिछले दिन से ही थाने में थी। बालिका ने इस संबंध में न्याय पीठ को लिखित शिकायत भी दी। मामले की जानकारी होने पर न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव और मंजू त्रिपाठी ने बालिका को थाने में रोके जाने की कार्रवाई को बाल हित और बाल अधिनियम-2015 के प्रावधानों के विपरीत माना।
न्याय पीठ की ओर से थानाध्यक्ष और थाना बाल कल्याण अधिकारी को पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। समिति के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा ने कहा कि किसी भी दशा में नाबालिग बालिका को थाने में रोकना उचित नहीं है। समय से समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण बालिका के मेडिकल सहित अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं में विलंब हुआ, जो उसके सर्वोच्च हित में बाधक है। उन्होंने कहा कि बाल हित के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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