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Thursday, September 10, 2026

पत्रकारों का बिखराव लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए खतरा - मुर्तजा रहमानी


गोरखपुर। पत्रकारों और अखबार मालिकों पर बढ़ते दबाव, उत्पीड़न और हमले की घटनाओं पर ऑल इंडिया स्माल एंड मीडियम न्यूज पेपर्स फेडरेशन के गोरखपुर मंडल अध्यक्ष मुर्तजा हुसैन रहमानी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार अब भी संगठित नहीं हुए तो आने वाले समय में पत्रकारिता और पत्रकारों के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने पत्रकारों से व्यक्तिगत मतभेद और आपसी श्रेष्ठता की भावना से ऊपर उठकर एकजुट होने का आह्वान किया।
रहमानी ने कहा कि पत्रकार अपनी कलम के माध्यम से समाज में होने वाले अन्याय, नाइंसाफी और घटनाओं को सामने लाकर शासन-प्रशासन और आम जनता का ध्यान आकर्षित करता है। कई बार पीड़ित व्यक्ति को विभिन्न स्तरों पर न्याय नहीं मिलने पर पत्रकार ही उसकी आवाज बनकर उसे समाज और प्रशासन तक पहुंचाता है।
उन्होंने कहा कि सच लिखने और जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने के कारण कई बार पत्रकारों को दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। दबाव के बावजूद पत्रकार अपने दायित्व का निर्वहन करता है, लेकिन ऐसे समय में पत्रकार समाज का बिखराव उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है। उन्होंने कहा कि किसी एक पत्रकार के साथ होने वाले अन्याय पर यदि दूसरे पत्रकार चुप रहेंगे तो ऐसी प्रवृत्तियों को और बढ़ावा मिलेगा।
- अधिवक्ता समाज की एकता से सीखें पत्रकार
मुर्तजा हुसैन रहमानी ने कहा कि पत्रकारों को अधिवक्ता समाज की एकता से सीख लेनी चाहिए। किसी अधिवक्ता साथी के साथ उत्पीड़न या नाइंसाफी होने पर पूरा अधिवक्ता समाज उसके समर्थन में खड़ा दिखाई देता है। इसी तरह पत्रकार समाज को भी अपने साथियों के लिए मजबूती से खड़ा होना होगा।
उन्होंने कहा कि आज संकट किसी एक पत्रकार के सामने है तो कल वही स्थिति किसी दूसरे पत्रकार के सामने भी आ सकती है। इसलिए पत्रकार और अखबार मालिक व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करें और अपने अधिकार, सम्मान एवं सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संगठित होकर आवाज उठाएं। पत्रकारों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत और कलम की स्वतंत्रता की रक्षा का मजबूत आधार है।

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