खजनी। तहसील बार एसोसिएशन खजनी ने तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्य प्रकाश श्रीवास्तव और महामंत्री चन्द्रमौली कुमार शर्मा ने आरोप लगाया कि तहसीलदार के खिलाफ लगातार शिकायतें और आपत्तियां दर्ज कराने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिवक्ताओं का कहना है कि उन्हें बार-बार आश्वासन तो दिया जा रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
बार पदाधिकारियों ने बताया कि एक पत्रावली की नियत तिथि 23 जनवरी निर्धारित थी, लेकिन आरोप है कि उसे 22 जनवरी से ही पुकारा जाने लगा। इस पर अधिवक्ताओं ने आपत्ति दर्ज कराई। आरोप है कि आपत्ति के बावजूद न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत वाद को अन्य न्यायालय में पुकारे जाने का प्रयास किया गया। इसको लेकर अधिवक्ताओं और तहसीलदार के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई। बार एसोसिएशन का कहना है कि इसी प्रकरण के बाद से तहसीलदार न्यायालय के न्यायिक कार्य का विरोध जारी है।
अधिवक्ता पदाधिकारियों ने तहसीलदार के पूर्व कार्यकाल से जुड़े कुछ विवादों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि तहसीलदार सदर के पद पर रहते हुए पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया था। वहीं, खजनी तहसील में तैनाती के बाद उपजिलाधिकारी न्यायालय में कार्यरत पेशकार के साथ कथित अभद्र व्यवहार के बाद कर्मचारियों में भी आक्रोश की स्थिति बनी थी। हालांकि इन आरोपों पर तहसीलदार का पक्ष सामने नहीं आया है।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि तहसील में मुकदमों की कार्यवाही के दौरान नियमों की अनदेखी से वादकारियों और अधिवक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कम्प्यूटरीकृत न्यायिक व्यवस्था में भी विसंगतियों का आरोप लगाते हुए कहा कि न्यायालय में मुकदमा लंबित रहने के बावजूद कम्प्यूटर रिकॉर्ड में वाद खारिज प्रदर्शित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
अधिवक्ताओं ने कहा कि खजनी तहसील मुख्यमंत्री के गृह जनपद में आती है। इसके बावजूद यदि न्यायिक एवं राजस्व कार्यों को लेकर इस प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं तो यह गंभीर विषय है। बार पदाधिकारियों के अनुसार, उन्होंने मुख्यमंत्री सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया है। जिलाधिकारी की ओर से तहसीलदारों की कमी दूर होने के बाद स्थानांतरण किए जाने का आश्वासन दिए जाने की बात भी कही गई, लेकिन अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
बार एसोसिएशन ने उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने, शिकायतों का शीघ्र निस्तारण करने और तहसील की न्यायिक व्यवस्था को सुचारु कराने की मांग की है। पदाधिकारियों ने कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो अधिवक्ता आगे की रणनीति तय करने के लिए बाध्य होंगे।

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