गोरखपुर। आंगनबाड़ी कर्मचारी व सहायिका एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बढ़ाई गई ₹2,500 प्रोत्साहन राशि को मूल मानदेय में शामिल कर नियमित भुगतान किए जाने की मांग की है। इस संबंध में एसोसिएशन की जिला महामंत्री पुष्पा शुक्ला ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है।
पत्र में कहा गया है कि प्रदेश की करीब 3.45 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की घोषणा के लिए संगठन मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करता है। साथ ही ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा और यूनिफॉर्म के लिए ₹500 की बढ़ोतरी के लिए भी धन्यवाद दिया गया है। संगठन के अनुसार वर्तमान घोषणा में ₹1,500 मूल मानदेय तथा ₹2,500 प्रोत्साहन राशि के रूप में बढ़ाए गए हैं। संगठन की मांग है कि ₹2,500 की प्रोत्साहन राशि को भी मूल मानदेय में शामिल किया जाए, जिससे इसका हर महीने नियमित भुगतान सुनिश्चित हो सके।
एसोसिएशन ने कहा कि पूर्व से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी कई स्थानों पर नियमित नहीं हो पा रहा है। कई जनपदों में कई-कई महीनों की राशि लंबित है। कहीं एक-दो महीने की राशि कई महीने बाद मिलती है तो कहीं लंबे समय तक भुगतान नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में प्रोत्साहन राशि को मूल मानदेय में शामिल करना आवश्यक है।
पत्र में पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से केंद्र खोलने और संचालन के लिए लागू जीपीएस आधारित उपस्थिति व्यवस्था को भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए कठिन बताया गया है। संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या रहती है और आर्थिक परेशानी के कारण कई कार्यकर्ताओं के मोबाइल नियमित रूप से रिचार्ज भी नहीं हो पाते। इसके अलावा विभागीय बैठक, प्रशिक्षण, रैली, परियोजना कार्यालय तथा अन्य सरकारी कार्यों के लिए कार्यकर्ताओं को केंद्र से बाहर जाना पड़ता है। ऐसे में जीपीएस के माध्यम से केंद्र की स्थिति दर्ज करना संभव नहीं होता।
एसोसिएशन ने ₹2,500 को मूल मानदेय में शामिल कर नियमित भुगतान, लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान तथा जीपीएस व्यवस्था लागू न किए जाने की मांग की है।

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