पत्र में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 16(1) समानता के अधिकार की गारंटी देते हैं। इसके बावजूद धर्म के आधार पर दलित मुस्लिम समुदाय को अनुसूचित जाति के दर्जे से वंचित रखा जाना सामाजिक न्याय और समानता की भावना के अनुरूप नहीं है।
अताउल्लाह शाही ने पत्र में वर्ष 2006 की सच्चर समिति तथा वर्ष 2007 में प्रस्तुत न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों रिपोर्टों में मुस्लिम समुदाय के सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति पर चिंता जताई गई थी। पत्र के अनुसार, रंगनाथ मिश्र आयोग ने दलित मुसलमानों और दलित ईसाइयों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की सिफारिश की थी।
उन्होंने राष्ट्रपति से संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के पैरा-3 में आवश्यक संशोधन अथवा उचित संवैधानिक कार्रवाई कर धर्म आधारित प्रतिबंध समाप्त करने तथा पात्र दलित मुस्लिम समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा प्रदान करने की मांग की। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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