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Saturday, August 29, 2026

राष्ट्रीय खेल दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर पक्कीबाग में खेल प्रतिभाओं ने दिखाया दमखम


गोरखपुर। सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) पक्कीबाग में शनिवार को राष्ट्रीय खेल दिवस एवं हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विद्यालय के शारीरिक आचार्य अरविंद दुबे ने मेजर ध्यानचंद के जीवन, संघर्ष, खेल प्रतिभा और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा के बल पर भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित करने वाले महान खिलाड़ी थे। उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से खेलों को जीवन का अभिन्न अंग बनाने तथा अनुशासन, परिश्रम, खेल भावना और टीम भावना को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है और वे जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करती हैं।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर कबड्डी, रस्साकसी, लंबी कूद, ऊंची कूद, वॉलीबॉल और फुटबॉल सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने मेजर ध्यानचंद जयंती एवं राष्ट्रीय खेल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विद्यालय के विद्यार्थियों ने खेल के क्षेत्र में जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय एवं क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि खेलों से विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, सहयोग और संघर्षशीलता जैसे गुण विकसित होते हैं। शिक्षा के साथ खेलों में सक्रिय सहभागिता विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के शारीरिक प्रमुख आचार्य दीपेंद्र सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने प्रतियोगिताओं के सुचारु संचालन एवं विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित की। इस अवसर पर विद्यालय परिवार के समस्त आचार्य, दीदी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।

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