- ‘माननीयों को मिलेगी पेंशन चार, कर्मचारी लाचार’ : रूपेश श्रीवास्तव
- ‘एक राष्ट्र, एक पेंशन’ की नीति लागू करे केंद्र सरकार : मदन मुरारी शुक्ल
परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि वर्षों तक सरकारी सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पुरानी पेंशन को सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ मानती है तो सांसदों और विधायकों समेत जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था पर भी उसी कसौटी से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “माननीयों को मिलेगी पेंशन चार, कर्मचारी लाचार—यह व्यवस्था कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं करती।” उन्होंने जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग पेंशन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए समान नीति अपनाने की मांग की।
परिषद के महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने कहा कि कर्मचारी अपने सेवाकाल में सरकार की योजनाओं और नीतियों को धरातल पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद उनके भविष्य को बाजार आधारित व्यवस्था के भरोसे छोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
मदन मुरारी शुक्ल ने कहा, “एक राष्ट्र, एक पेंशन की व्यवस्था होनी चाहिए। दोहरी पेंशन नीति से सरकार में बैठे लोग मालामाल और कर्मचारी कंगाल हो रहे हैं।” उन्होंने कहा कि एनपीएस में कर्मचारी और सरकार के योगदान के बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन को लेकर कर्मचारियों में अनिश्चितता बनी रहती है।
परिषद ने कहा कि यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को विकल्प के तौर पर लागू किए जाने के बावजूद कर्मचारियों की पुरानी पेंशन से जुड़ी मूल चिंताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। कर्मचारियों की मांग है कि ऐसी पेंशन व्यवस्था हो, जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और सुनिश्चित आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
परिषद पदाधिकारियों ने राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि जब विभिन्न राज्यों में पुरानी पेंशन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं तो केंद्र सरकार को भी कर्मचारियों की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सरकार के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें
परिषद ने केंद्र सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, एनपीएस/यूपीएस की विसंगतियां दूर करने, कर्मचारियों को सुरक्षित पेंशन देने, सांसदों-विधायकों सहित जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था की समीक्षा करने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
परिषद ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांगों की अनदेखी जारी रही तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन को और व्यापक करने के लिए बाध्य होगा।

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