परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सरकारी कर्मचारी अपने सेवाकाल में सरकार की नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि पुरानी पेंशन को सरकारी खजाने पर वित्तीय भार माना जाता है तो जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था पर भी समान दृष्टिकोण से विचार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “माननीय को मिलेगी पेंशन चार, कर्मचारी लाचार” जैसी स्थिति को समाप्त करने की जरूरत है। कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग पेंशन व्यवस्था को लेकर परिषद ने समान नीति की मांग की।
परिषद के महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने कहा कि कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही पुरानी पेंशन की मांग को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनपीएस में कर्मचारी और सरकार के योगदान के बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन को लेकर कर्मचारियों में असुरक्षा बनी हुई है। यूपीएस को लेकर भी कर्मचारियों की सभी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को ऐसी पेंशन व्यवस्था चाहिए जिसमें सेवानिवृत्ति के बाद नियमित और सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो। “एक राष्ट्र, एक पेंशन” की नीति लागू किए जाने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि पेंशन व्यवस्था में समानता और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
परिषद ने केंद्र सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, एनपीएस/यूपीएस की विसंगतियां दूर करने, कर्मचारियों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सांसदों-विधायकों सहित सभी जनप्रतिनिधियों की पेंशन व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की।
परिषद नेताओं ने कहा कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा।
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