वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
लखनऊ । कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से रविवार को लखनऊ में पीएम-सेतु उद्योग सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में रक्षा, विनिर्माण, कौशल विकास और उद्योग जगत से जुड़े वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य उद्योगों की भागीदारी बढ़ाकर आईटीआई को विश्वस्तरीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करना रहा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्योग जगत से पीएम-सेतु के साथ सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी महाशक्ति बनाने के लिए कुशल मानव संसाधन जरूरी है। रक्षा विनिर्माण, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन, रोबोटिक्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, इसलिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार के साथ कौशल विकास तंत्र को भी मजबूत करना होगा। उत्तर प्रदेश के तेजी से उभरते रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। रक्षा मंत्री ने डीपीएसयू और अन्य रक्षा संगठनों से आईटीआई के आधुनिकीकरण तथा अप्रेंटिसशिप के अवसर बढ़ाने में योगदान देने की अपील की।
केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पीएम-सेतु सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी का नया मॉडल है। उन्होंने उद्योगों से केवल सीएसआर तक सीमित न रहकर आईटीआई के विकास में सक्रिय जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कौशल विकास राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। सम्मेलन में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में पीएम-सेतु के तहत आठ क्लस्टरों में 32 आईटीआई चिन्हित हैं। इनमें एक हब और चार स्पोक आईटीआई वाले क्लस्टर में 241 करोड़ रुपये तक का निवेश संभव है।
कार्यक्रम में एनएसडीसी और लखनऊ छावनी बोर्ड के बीच एमओयू भी हुआ। इसके तहत ‘शौर्य अकादमी’ स्थापित की जाएगी, जो युवाओं को सशस्त्र बलों, पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में करियर के लिए तैयार करेगी।

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