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Tuesday, August 18, 2026

स्वच्छता स्वस्थ और विकसित समाज की आधारशिला - सूरज चक्रवर्ती

स्वच्छता हमारा नैतिक कर्तव्य है, यह वह कड़ी है जहाँ से स्वस्थ समाज की कल्पना की रेखाएं रेखांकित होती हैं,यह एक अभियान  नहीं बल्कि एक सभ्य, उत्तम स्वास्थ्य और सुदृढ़ समाज की आधारशिला है,एक स्वच्छ वातावरण ही हमें शारीरिक और मानसिक प्रसन्नता में सहायक है, सरकार भी स्वच्छता जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए गांव और शहरों के सार्वजनिक स्थानों पर दीवाल लेखन और चित्रकारी के माध्यम से जनमानस को जागरूक करने का बेहतर प्रयास कर रही है,, स्वच्छता आचरण का एक परिदृश्य होता है जो हमारे  कार्यों,विचारों और मस्तिष्क पर सीधा असर करता है, अधिकांश बीमारियां गंदगी से ही जन्म लेती हैं और देखते -देखते व्यापक महामारी का जन्म ले लेती हैं, जिससे जनहानि के साथ -साथ लोगो के लिए आर्थिक संकथ खड़ा हो जाता है, जहाँ सम्पूर्ण स्वच्छता का पालन होता है वहा बीमारियों का खतरा कम हो जाता है, और मनुष्य का जीवन स्तर श्रेठ होता है,,
    सरकार द्वारा संचालित स्वच्छ भारत मिशन स्वच्छता की रीढ़ बन रहा है, जिससे समाज मे जागरूकता के साथ -साथ स्वच्छता के आयाम स्थापित किए जा रहे हैं, जो स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का सराहनीय प्रयास साबित हो रहा है,! जनजागरूकता एवं जनभागीदारी स्वच्छता का मूल विन्दु होता है, हमारा समाज जितना अधिक स्वच्छता से प्रेरित होगा उतना ही हमारा समाज और राष्ट्र विकसित होगा, स्वच्छता अभियान का उद्देश्य केवल सड़को, नालियों एवं सार्वजनिक स्थानों की सफाई करने से ही नहीं स्वच्छता का संकल्प पूरा हो सकता बल्कि स्वच्छता के प्रति जागरूकता लोगो के आदत में दिखाई देना चाहिए !
  महात्मा गाँधी जी स्वच्छता को सबसे पुण्य कार्य मानते थे, बापू जी जनमानस के लिए स्वच्छता स्वतंत्रता से श्रेठ बताया था , स्वच्छता न केवल एक सफाई कर्मी का कार्य है बल्कि आमजनमानस को भी स्वच्छता के लिए श्रमदान और जनभागीदारी का हिस्सा बनना चाहिए, स्वच्छता का मूल्यांकान कभी भी छोटे कार्यों से करना नादानी ही माना जाता है, एक स्वच्छ परिवेश ही हमारे शारीरिक और मानसिक विकास मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है,! हम सभी को स्वच्छता की शुरुआत सदैव स्वयं ही अपने कार्य स्थल से शुरू करना ज्यादा श्रेठ होता है,
 देश के प्रधानमंत्री जी स्वच्छता के प्रति संकल्प को हम नहीं भूल सकते है,,उन्होंने स्वयं झाड़ू लगाकर देशवासियो को स्वच्छता का प्रेरणादायक सन्देश देते रहे हैं!प्रधानमंत्री जी का मानना है ज़ब तक स्वच्छता समाज के उस गरीब व्यक्ति तक नहीं पहुंच जाता तब तक स्वच्छता का संकल्प अधूरा है, जो कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बना स्वच्छ शौचालय प्रस्तुत साक्ष्य है, दो गड्ढों वाला शौचालय स्वच्छता के क्षेत्र में किसी क्रांति से कम नहीं रहा है, खुले मे शौच अनेक बीमारियों को जन्म देता है, पूर्वांचल की महामारी दिमागी बुखार जैसी लाइलाज बिमारियों के लिए स्वच्छ शौचालय किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रहा है,!गांव को स्वच्छता की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ग्राम स्तर पर स्वच्छता समितियों का भी  स्वच्छता के लिए गठन प्रभावी कदम है, जो स्वच्छता जागरूकता के साथ -साथ महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत करती है,  इस स्वच्छता समिति के गठन के बिना गांव की सरकार भी नहीं बनती है,!
    आज़ प्लास्टिक प्रदुषण आज़ समूचे विश्व के लिए किसी चुनौती से कम नहीं बना है, जिस प्लास्टिक को मानव अपनी सुविधा के लिए निर्मित किया था आज़ वही पर्यावरण के लिए जहर बन चुका है, सरकार भी इसके नियंत्रण के लिए प्रभावी कानून बना रखा है और पकड़े जाने पर सजा एवं जुर्माने का प्राविधान है, स्वच्छ भारत मिशन के द्वितीय चरण में इस अजैविक कचरे से जीत की व्याख्या लिखी जा चुकी है, लेकिन बिना जागरूकता और जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है, हम सभी को अपने स्वयं के कार्यव्यों को समझना होगा और अपना कचरा अलग -अलग कूड़ेदानो का प्रयोग स्वच्छ भारत मिशन के सपनो को नया पँख दे सकता है!पालीथीन निरंतर हमारे कपड़े एवं जुट के थैले जो प्राचीन विरासर हुआ करता था इसे भी छीन ले रहा है! हमारे घरो से निकलने वाला दूषित जल भी हमारे लिए बीमारियों को दावत दे रहा है जिससे खुद ही लड़ने का प्रयास करना होगा, हमारे जागरूकता के आभाव में प्लास्टिक और पालीथीन हमारे जल श्रोतो मे जमा हो रहे हैं , प्लास्टिक के विषाक्त कण हमारे जीवन दायिनी तालाब,नदियां और समुद्र को निरन्तर दूषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है!समझदारी और स्वच्छता जन आंदोलन ही इसे स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण प्रयास साबित हो सकता है!आज़ प्लास्टिक और पालीथीन का प्रयोग न करने पर्यावरणीय स्वच्छता का प्रथम सोपान है, गांव -गांव बना ठोस अपशिस्ट प्रवधन केंद्र स्वच्छता के साथ -साथ गांव को आर्थिक समृद्ध करने का आधार बन रहा है,!
   हम स्वच्छता अपनी आदत मे अपनाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान दे सकते हैं और हमारी अगली पीढ़ी स्वच्छ पर्यावरण की कल्पना कर सकती है! हम सभी के सामूहिक जिम्मेदारी से स्वच्छ भारत मिशन शिखर को छू सकता है यदि सभी आमजनमानस अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो हमारा मोहल्ला, गांव, शहर और देश स्वच्छ और सुन्दर बन सकता है, और स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत का संकल्प साकार हो सकेगा!!

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