गोरखपुर। सरस्वती शिशु मंदिर (10+2) पक्कीबाग में 'मातृभारती' के गठन एवं दायित्व बोध के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर बच्चों के सर्वांगीण विकास, संस्कार निर्माण तथा मातृशक्ति की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही नए सत्र के लिए मातृभारती की नई कार्यकारिणी का गठन भी किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की गृहविज्ञान प्रवक्ता वैभवी सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की प्रोफेसर गरिमा साही उपस्थित रहीं। प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए मातृभारती के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। आचार्या प्रियदर्शिनी ने प्रेरक गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावपूर्ण बनाया।
मुख्य वक्ता प्रो. गरिमा साही ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माताओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता को बच्चों के साथ संवाद, संस्कार और सम्मान इन तीन मूलभूत पहलुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि मातृभारती का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है, ताकि बच्चों के नैतिक, मानसिक और सामाजिक विकास में मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई। प्रिया को अध्यक्ष, सुमन पाण्डेय को उपाध्यक्ष, पुष्पा सिंह को मंत्री, नेहा जायसवाल को सहमंत्री तथा रोशनी कश्यप को कोषाध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों का भी सर्वसम्मति से चयन किया गया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में 'महिला सशक्तिकरण' विषय पर उपस्थित माताओं ने अपने विचार और अनुभव साझा किए। समापन पर डॉ. माण्डवी सिंह ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं मातृशक्ति के प्रति आभार व्यक्त किया।

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