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Thursday, July 2, 2026

युवा बन रहे हाई ब्लड प्रेशर के शिकार, समय रहते संभलना जरूरी - डॉ. सतीश कुमार




लखनऊ। इंडियन सोसायटी ऑफ हाइपरटेंशन (आईएसएच) उत्तर प्रदेश चैप्टर की प्रथम वार्षिक कॉन्फ्रेंस "हाइपरटेंशन-2026" में विशेषज्ञों ने युवा वयस्कों में तेजी से बढ़ रहे उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बताया। सुल्तानपुर ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में आयोजित इस सम्मेलन में प्रदेशभर के वरिष्ठ चिकित्सकों, हृदय रोग विशेषज्ञों, मेडिकल शिक्षकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल विद्यार्थियों ने भाग लिया।
सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्र में डॉ. सतीश कुमार ने "युवा वयस्कों में उच्च रक्तचाप : जीवनशैली से जेनेटिक्स तक" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि हाई ब्लड प्रेशर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने इसे "साइलेंट एपिडेमिक" यानी "मूक महामारी" बताते हुए कहा कि अधिकांश युवाओं को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चल पाता, क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
उन्होंने कहा कि फास्ट फूड, अत्यधिक नमक का सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अपर्याप्त नींद, धूम्रपान, शराब, तनाव और अनियमित दिनचर्या जैसे कारण युवाओं में रक्तचाप बढ़ाने के प्रमुख कारक बन रहे हैं। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी रोग और समय से पहले मृत्यु के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
डॉ. सतीश कुमार ने कहा कि जिन परिवारों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह या हृदय रोग का इतिहास है, उनमें जोखिम अधिक रहता है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने प्रत्येक युवा को 18 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से रक्तचाप की जांच कराने की सलाह दी।
विशेषज्ञों ने उच्च रक्तचाप की रोकथाम के लिए प्रतिदिन 30 से 45 मिनट व्यायाम, कम नमक वाला संतुलित आहार, फल और हरी सब्जियों का सेवन, पर्याप्त नींद तथा योग और तनाव प्रबंधन को जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। साथ ही चिकित्सकों से दवाओं के साथ-साथ लोगों को जीवनशैली में बदलाव के लिए प्रेरित करने का भी आह्वान किया गया।
सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने युवा वर्ग में बढ़ते उच्च रक्तचाप को देखते हुए जन-जागरूकता अभियान, नियमित स्क्रीनिंग और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। आयोजन समिति ने इसे चिकित्सा शिक्षा और जनस्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए भविष्य में भी ऐसे वैज्ञानिक सम्मेलनों के नियमित आयोजन की जरूरत बताई।

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