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Saturday, July 4, 2026

5 दशक की साहित्य साधना के लिए डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ राष्ट्रीय साहित्य भाष्कर सम्मान से सम्मानित


बस्ती। पिछले पांच दशक से साहित्य साधना में समर्पित आठ पुस्तकों के रचयिता और दमदार दोहों के जनक 74 वर्षीय डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर शनिवार को प्रेस क्लब सभागार में संगोष्ठी और राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार डॉ. त्रिभुवन प्रसाद मिश्र तथा संचालन डॉ. अफजल हुसैन ‘अफजल’ ने किया।
साहित्यिक संस्था अदबी संगम के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं और कवि-शायरों ने डॉ. जगमग को अंगवस्त्र भेंट कर ‘राष्ट्रीय साहित्य भाष्कर सम्मान’ से सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि कवि एवं चिकित्सक डॉ. वी.के. वर्मा ने कहा कि डॉ. जगमग की साहित्य यात्रा विविधता से परिपूर्ण है। उनकी कृतियां ‘चाशनी’, ‘किसी की दिवाली किसी का दिवाला’, ‘हम तो केवल आदमी हैं’, ‘सच का दस्तावेज’, ‘खुशियों की गौरैया’, ‘बाल सुमन’, ‘बाल चेतना’ और ‘नन्हें-मुन्नों का संसार’ आम आदमी की पीड़ा और संवेदनाओं को सशक्त अभिव्यक्ति देती हैं। उन्होंने बताया कि डॉ. जगमग इन दिनों स्वामी विवेकानंद पर केंद्रित महाकाव्य का सृजन कर रहे हैं।
प्रेस क्लब अध्यक्ष एवं शायर विनोद उपाध्याय ने कहा कि नई पीढ़ी डॉ. जगमग से बहुत कुछ सीख सकती है। बी.के. मिश्र ने उनके रचना संसार को जन सरोकारों से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनके तीखे व्यंग्य और कटाक्ष श्रोताओं की जुबान पर चढ़े हुए हैं। दीपक सिंह प्रेमी ने कहा कि डॉ. जगमग का साहित्यिक संसार अत्यंत व्यापक है।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. त्रिभुवन प्रसाद मिश्र ने कहा कि डॉ. जगमग का पूरा जीवन साहित्य को समर्पित रहा है और वे अपनी रचनाओं के माध्यम से आम आदमी की भावनाओं को सहजता से अभिव्यक्त करते हैं।
सम्मान से अभिभूत डॉ. राम कृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि उन्होंने जीवन के अनुभवों को शब्दों में ढालने का प्रयास किया है और यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद पर केंद्रित उनका महाकाव्य शीघ्र ही पाठकों के बीच होगा।
पत्रकार जयंत मिश्र ने कहा कि देश-विदेश के कवि मंचों पर अपनी पहचान बना चुके डॉ. जगमग नई पीढ़ी के लिए साहित्य की पाठशाला और मार्गदर्शक हैं।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में आयोजित कवि सम्मेलन में ताजीर वस्तवी, सलीम बस्तवी, दीपक सिंह प्रेमी, अर्चना श्रीवास्तव, वसीउल हक ‘वसी’, मकसूद वस्तवी, अनवार पारसा, जगदंबा प्रसाद ‘भावुक’, हरिकेश प्रजापति, डॉ. राजेंद्र सिंह ‘राही’, विनोद उपाध्याय, डॉ. वी.के. वर्मा, डॉ. पारस वैद्य, तेज प्रकाश शुक्ल, समीर तिवारी और डॉ. अफजल हुसैन ‘अफजल’ सहित अनेक कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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