गोरखपुर। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति संगठनों के संयुक्त मोर्चा ने जिलाधिकारी गोरखपुर को ज्ञापन सौंपकर ओबीसी वर्ग की कुछ जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने के प्रयासों पर आपत्ति जताई है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जाति संबंधी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे सामाजिक और संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ज्ञापन में कहा गया है कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के माध्यम से पूर्व सांसद प्रवीण निषाद को मछुआरा समुदाय से जोड़ते हुए अनुसूचित जाति वर्ग का बताया गया, जबकि निषाद, केवट, मल्लाह आदि जातियां प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में शामिल हैं। मोर्चा का कहना है कि इस प्रकार की जानकारी से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
संयुक्त मोर्चा ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्ष 2005, 2016 और 2019 में प्रदेश सरकार द्वारा 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति सूची में शामिल करने संबंधी प्रयास किए गए थे, जिन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 अगस्त 2022 को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इस प्रकार के निर्णय संविधान के अनुच्छेद 341(2) के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं।
मोर्चा के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि जाति संबंधी तथ्यों को सही तरीके से सार्वजनिक किया जाए तथा अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन पर संगठन के कई पदाधिकारियों के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।

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