बस्ती। न्याय की आस में पिछले आठ वर्षों से भटक रहे मुण्डेरवा थाना क्षेत्र के हल्लौर नगरा निवासी दलित युवक ऋषिराज पुत्र राजेश कुमार ने एक बार फिर पुलिस अधीक्षक का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ कथित चिकित्सीय लापरवाही और उससे जुड़े मुकदमे में शेष आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताते हुए न्याय दिलाने की मांग की है।
पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में ऋषिराज ने बताया कि उनकी पत्नी अमृता की डिलीवरी ग्लोबल हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर, सजनाखोर बनकटी में हुई थी। आरोप है कि प्रसव के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने नवजात शिशु की स्थिति के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी और हालत गंभीर होने पर उनकी पत्नी को कैली अस्पताल भेज दिया गया। वहां चिकित्सकों को उसकी जान बचाने के लिए बच्चेदानी निकालनी पड़ी। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट में डाल दिया।
ऋषिराज के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय के आदेश पर लालगंज थाने में वीरनारायण चौधरी, सूरज चौधरी, मनोज कुमार, राधिका चौधरी, रेनू और रूखसार के विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। लेकिन मुकदमा दर्ज होने के करीब आठ वर्ष बाद भी पुलिस ने केवल एक आरोपी मनोज कुमार के विरुद्ध ही आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया है, जबकि अन्य पांच नामजद आरोपियों के विरुद्ध अब तक कोई चार्जशीट नहीं भेजी गई।
पीड़ित का आरोप है कि शेष आरोपी प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराते हुए लंबित आरोपियों के विरुद्ध शीघ्र आरोप पत्र दाखिल कराने और दोषियों को कानून के कटघरे तक पहुंचाने की मांग की है।
ऋषिराज ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के बावजूद यदि वर्षों तक जांच अधूरी रहे तो पीड़ित परिवार का न्याय व्यवस्था से विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्हें शीघ्र न्याय दिलाएगा।

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