वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
बस्ती/हर्रैया। सामाजिक कार्यकर्ता एवं मनोरमा संरक्षण अभियान से जुड़े चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ ने कहा कि मनोरमा नदी और मखौड़ाधाम की दुर्दशा को लेकर वर्षों से चल रहे जनआंदोलन को उस समय बड़ी पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यक्रम “मन की बात” में इस विषय का उल्लेख किया। उन्होंने इसे क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और युवाओं के संघर्ष की उपलब्धि बताया।
सुदामा ने कहा कि वर्ष 2011-12 से मनोरमा नदी की सफाई और मखौड़ाधाम के विकास के लिए जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और जनसंपर्क के माध्यम से लगातार इस मुद्दे को उठाया गया। हाल के दिनों में स्थानीय युवाओं ने मखौड़ाधाम में सैकड़ों विसर्जित मूर्तियां निकालकर हजारों कुंतल मलबा और अपशिष्ट हटाया। साथ ही झुंगीनाथ और पंडूलघाट पर भी सफाई अभियान चलाया गया।
उन्होंने कहा कि यह गंभीर प्रश्न है कि जो कार्य प्रशासन और संबंधित विभागों को नियमित रूप से करना चाहिए, उसे समाज के युवाओं को क्यों करना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मनोरमा नदी संरक्षण के लिए स्थायी एवं समयबद्ध कार्ययोजना बनाने, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा विसर्जन प्रबंधन की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करने की मांग की।
सुदामा ने कहा कि मनोरमा केवल नदी नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री द्वारा विषय का संज्ञान लिया जाना गौरव की बात है, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर ठोस कार्रवाई और जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

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