वॉयस ऑफ बस्ती संवाददाता
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘‘विकसित भारत-ग्रामीण भारत’’ के लक्ष्य को गति देने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड रुपये का अंतरिम आवंटन जारी किया है। इसमें उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक 9,721.48 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है। यह धनराशि ग्रामीण रोजगार, आधारभूत संरचना निर्माण, श्रमिकों के समयबद्ध मजदूरी भुगतान और गांवों के समग्र विकास को नई गति देगी।
इस संबंध में केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी भी मौजूद रहे।
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली नई व्यवस्था का संक्रमण पूरी तरह श्रमिक-केंद्रित और बाधारहित होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एक भी मजदूर काम से वंचित न रहे तथा रोजगार और मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की रुकावट स्वीकार नहीं की जाएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार पहले ही मनरेगा के लिए 30,000 करोड रुपये़ जारी कर चुकी है। नए अंतरिम आवंटन के बाद कुल राशि 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह धन देश की लगभग 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा, जिससे विकास कार्यों और रोजगार सृजन को मजबूती मिलेगी।
बैठक में डिजिटल और प्रशासनिक तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने डीबीटी, ई-केवाईसी, फेस ऑथेंटिकेशन और एसएमएस आधारित सूचना प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। साथ ही राज्यों को समय रहते अधिसूचनाएं जारी करने, कार्यों की पूर्व स्वीकृति देने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने और करोड़ों श्रमिकों को बेहतर आजीविका उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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